बिलासपुर के एसएस पब्लिक स्कूल में छात्र से मारपीट के आरोप पर हंगामा, स्कूल बसों की फिटनेस-इंश्योरेंस, चालकों के लाइसेंस..लैब-लाइब्रेरी और फीस व्यवस्था को लेकर एनएसयूआई ने उठाए सवाल!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) बैमा नगोई स्थित एसएस पब्लिक स्कूल में छात्र के साथ कथित मारपीट के मामले ने स्कूल की व्यवस्थाओं को भी सवालों के घेरे में ला दिया है। एनएसयूआई का आरोप है कि 11 अगस्त को सेलर ग्राम निवासी एक छात्र के साथ स्कूल में किसी सामान में तोड़फोड़ के आरोप को लेकर शिक्षकों ने मारपीट की। घटना के बाद परिजन बच्चे को उपचार के लिए स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां उपचार के बाद 13 अगस्त को उसे छुट्टी दी गई। इसके बाद परिजन और एनएसयूआई टीम विधानसभा अध्यक्ष विक्की यादव के नेतृत्व में स्कूल पहुंचे और प्रबंधन के समक्ष घटना को लेकर विरोध दर्ज कराया। एनएसयूआई ने आरोप लगाया कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। संगठन के अनुसार, प्रबंधन से चर्चा के लिए पहुंचने पर डायरेक्टर एसएस सिंह मौजूद नहीं थे और अस्थायी प्रिंसिपल से बातचीत हुई। इसी दौरान स्कूल की अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल सामने आए। सबसे गंभीर आरोप स्कूल बसों के संचालन को लेकर लगाए गए हैं। एनएसयूआई का दावा है कि स्कूल में करीब 10 बसें संचालित हैं, जिनमें से लगभग सात बसों के इंश्योरेंस और फिटनेस को लेकर कमियां हैं। सभी बसों के बिहार पासिंग होने का भी आरोप लगाया गया है। संगठन ने बसों के परमिट और चालकों के लाइसेंस को लेकर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि कुछ चालक वैध लाइसेंस के बिना वाहन चला रहे हैं, जबकि कुछ के लर्निंग लाइसेंस की अवधि भी समाप्त हो चुकी है। नाबालिगों से वाहन चलवाए जाने का आरोप भी लगाया गया है। एनएसयूआई ने कहा कि स्कूल बसों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में बच्चे सफर करते हैं। ऐसे में वाहनों के इंश्योरेंस, फिटनेस, परमिट और चालकों के लाइसेंस से जुड़ी किसी भी तरह की अनियमितता बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हो सकती है। संगठन ने परिवहन विभाग और जिला प्रशासन से स्कूल की सभी बसों के दस्तावेजों की जांच के साथ मौके पर भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है। साथ ही सवाल उठाया कि यदि विद्यालय करीब दो वर्षों से संचालित है तो अब तक बसों की फिटनेस और दस्तावेजों की नियमित जांच क्यों नहीं हुई। स्कूल की शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर भी एनएसयूआई ने सवाल उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि स्कूल की लाइब्रेरी में पर्याप्त पुस्तकें उपलब्ध नहीं हैं और वहां बिहार पाठ्यक्रम से संबंधित किताबें रखी मिलीं। छत्तीसगढ़ में संचालित विद्यालय में विद्यार्थियों को किस पाठ्यक्रम के अनुरूप अध्ययन कराया जा रहा है और उन्हें निर्धारित पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है या नहीं, इसकी जांच की मांग शिक्षा विभाग से की गई है। प्रयोगशाला को लेकर भी एनएसयूआई ने गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का दावा है कि लैब में आवश्यक उपकरण और संसाधन उपलब्ध नहीं थे और केवल बाहर लैब का बोर्ड लगा हुआ था। पहली से 12वीं तक संचालित विद्यालय में प्रयोगात्मक शिक्षा के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होने के आरोप ने स्कूल की शैक्षणिक गुणवत्ता और निरीक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल परिसर में मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी संगठन ने प्रबंधन को घेरा है। एनएसयूआई के अनुसार विद्यार्थियों के लिए वाटर कूलर की व्यवस्था नहीं थी। इसके अलावा स्कूल परिसर और कक्षाओं में मां सरस्वती, छत्तीसगढ़ महतारी, स्वतंत्रता सेनानियों तथा शिक्षा जगत से जुड़े प्रमुख विद्वानों के चित्र नहीं लगाए जाने पर भी आपत्ति जताई गई। संगठन का कहना है कि स्कूल को संचालित हुए करीब दो वर्ष हो चुके हैं, बावजूद इसके इन व्यवस्थाओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। फीस वसूली को लेकर भी एनएसयूआई ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का दावा है कि फीस जमा करने में एक दिन की देरी होने पर स्कूल फीस और बस शुल्क में प्रतिदिन 10 रुपये अतिरिक्त लिए जाते हैं। एनएसयूआई ने इसे अनुचित वसूली बताते हुए प्रशासन से फीस संबंधी नियमों और स्कूल की पूरी शुल्क व्यवस्था की जांच कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के किसान, मजदूर और सामान्य परिवार अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए निजी स्कूलों का रुख करते हैं, ऐसे में अतिरिक्त शुल्क का बोझ उनके लिए परेशानी का कारण बन सकता है। एनएसयूआई के मुताबिक स्कूल प्रबंधन के सामने बसों, लाइब्रेरी, लैब, पेयजल और फीस सहित अन्य व्यवस्थाओं को लेकर सवाल रखे गए तो प्रबंधन ने सुधार का भरोसा दिया। संगठन का दावा है कि प्रबंधन की ओर से कुछ व्यवस्थाओं की जानकारी नहीं होने की बात भी कही गई। इस पर एनएसयूआई ने सवाल उठाया कि विद्यालय की रोजमर्रा की व्यवस्थाओं और विद्यार्थियों की सुरक्षा की निगरानी आखिर किस स्तर पर की जा रही है। मामले ने जिला शिक्षा विभाग और प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। एनएसयूआई ने मांग की है कि मामले को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रखने के बजाय स्कूल का मौके पर निरीक्षण कराया जाए। खासतौर पर छात्र से कथित मारपीट, स्कूल बसों के दस्तावेज, चालकों के लाइसेंस, लाइब्रेरी, लैब, पेयजल और फीस व्यवस्था की निष्पक्ष जांच की जाए। एनएसयूआई ने स्कूल प्रबंधन को 15 दिनों के भीतर व्यवस्थाओं में सुधार करने की चेतावनी दी है। संगठन का कहना है कि निर्धारित अवधि में सुधार नहीं हुआ और प्रशासन ने आरोपों पर कार्रवाई नहीं की तो जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय सहित संबंधित विभागों के समक्ष आंदोलन किया जाएगा।
