सुरक्षित खदान की नई सोच: अब मशीनों से नहीं, मजबूत ‘माइंड से तय होगी सेफ्टी’..SECL मुख्यालय में ‘माइन सेफ्टी एंड माइंड सेफ्टी’ कार्यक्रम, ‘इनर एक्सीलेंस सीरीज़’ का शुभारंभ!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड मुख्यालय में मंगलवार को सुरक्षित मन, सुरक्षित खदान विषय पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में कर्मचारियों की मानसिक मजबूती को खदान सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया गया। राष्ट्रीय अभियान पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन के तहत आयोजित कार्यक्रम में सुरक्षित कार्य संस्कृति, मानसिक सशक्तिकरण और व्यक्तित्व विकास पर विशेष जोर दिया गया। इस दौरान कर्मचारियों के सर्वांगीण विकास और कार्यस्थल पर उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एसईसीएल-इनर एक्सीलेंस सीरीज़ का भी शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का आयोजन एसईसीएल और ब्रह्माकुमारीज़ के साइंटिस्ट्स, इंजीनियर्स एंड आर्किटेक्ट्स विंग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक हरीश दुहन रहे, जबकि ब्रह्माकुमारीज़ के राष्ट्रीय समन्वयक बी.के. पीयूष भाई ने मुख्य वक्ता के रूप में कर्मचारियों को संबोधित किया। इस अवसर पर निदेशक (तकनीकी/संचालन) एन. फ्रैंकलिन जयकुमार, मुख्य सतर्कता अधिकारी हिमांशु जैन, निदेशक (तकनीकी/योजना एवं परियोजना) रमेश चंद्र महापात्र, बीके मंजू दीदी सहित मुख्यालय और विभिन्न क्षेत्रों के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। मुख्य वक्ता बी.के. पीयूष भाई ने कहा कि माइंड सेफ्टी ही माइन सेफ्टी की सबसे मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि किसी भी खदान की वास्तविक सुरक्षा केवल आधुनिक मशीनों और तकनीक से नहीं, बल्कि वहां कार्यरत कर्मचारियों की सकारात्मक सोच, मानसिक संतुलन और पूर्ण एकाग्रता से सुनिश्चित होती है। उन्होंने नियमित मेडिटेशन, स्मार्ट वर्क और शत-प्रतिशत समर्पण को सुरक्षित एवं उत्पादक कार्य संस्कृति का मूल मंत्र बताया। अपने अध्यक्षीय संबोधन में एसईसीएल के सीएमडी हरीश दुहन ने कर्मचारियों से स्वयं को निरंतर बेहतर बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वयं को बेहतर बनाइए, राष्ट्र निर्माण में अपना श्रेष्ठ योगदान दीजिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कर्मचारी सकारात्मक सोच, निष्ठा और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करे, तभी संगठन और राष्ट्र दोनों मजबूत बनेंगे। कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों और कर्मचारियों को पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन के प्रति सामूहिक शपथ दिलाई गई। साथ ही विशेष मेडिटेशन सत्र के माध्यम से तनाव प्रबंधन, मानसिक शांति और सकारात्मक जीवनशैली के व्यावहारिक उपायों की जानकारी भी दी गई।
