सेंदरी के किसानों ने प्रशासन से कार्रवाई और राहत की मांग: नाला बंद होने से खेतों में भरा पानी, 150 एकड़ कृषि भूमि पानी में डूबी..किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) पांच दिन पहले हुई मूसलाधार बारिश के बाद अब किसानों की परेशानी सामने आने लगी है। शहर से लगे ग्राम पंचायत सेंदरी में 150 एकड़ से अधिक कृषि भूमि जलमग्न हो गई है। खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूब गई हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान होने का दावा है। किसानों ने खेतों में जलभराव के लिए क्षेत्र में की जा रही कथित अवैध प्लाटिंग को जिम्मेदार ठहराते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई और मुआवजे की मांग की है। सेंदरी गांव के बड़ी संख्या में किसान अपनी समस्या लेकर प्रशासन के पास पहुंचे। किसानों का कहना है कि उन्होंने सैकड़ों एकड़ खेत में फसल की बुवाई की थी, लेकिन लगातार बारिश के बाद पूरा क्षेत्र जलमग्न हो गया। खेतों में कई फीट तक पानी भर जाने से फसलें डूब गई हैं और किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। किसानों का आरोप है कि क्षेत्र में की जा रही प्लाटिंग के चलते वर्षों पुराना करीब 25 फीट चौड़ा नाला बंद कर दिया गया है। पहले बारिश का पानी इसी नाले के जरिए आसानी से निकल जाता था, लेकिन नाला बंद होने के बाद जल निकासी की व्यवस्था पूरी तरह बाधित हो गई। इसका नतीजा यह हुआ कि बारिश का पानी खेतों में भर गया और सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि तालाब में तब्दील हो गई। किसान शिवकुमार साहू ने कहा कि किसानों ने मेहनत और लागत लगाकर खेतों में फसल लगाई थी, लेकिन बारिश के बाद पूरा खेत पानी में डूब गया। पहले बारिश का पानी नाले से निकल जाता था, लेकिन अब नाला बंद होने के कारण पानी खेतों में जमा है। उन्होंने कहा कि यदि जल निकासी की व्यवस्था जल्द नहीं की गई तो किसानों को हर साल इसी तरह नुकसान उठाना पड़ेगा। प्रशासन को मौके का निरीक्षण कर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए और प्रभावित किसानों को उचित राहत व मुआवजा देना चाहिए। कांग्रेस नेता राजेंद्र साहू ने कहा कि सेंदरी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर की जा रही कथित अवैध प्लाटिंग के कारण प्राकृतिक जल निकासी का रास्ता बंद कर दिया गया है। वर्षों पुराने नाले को बंद किए जाने से बारिश का पानी खेतों में भर गया और किसानों की फसल बर्बाद हो गई। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर नाले को तत्काल खुलवाया जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। किसानों को हुए नुकसान का आकलन कर उन्हें उचित मुआवजा भी दिया जाना चाहिए। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जल निकासी की व्यवस्था बहाल कर उन्हें राहत नहीं दी गई और कथित अवैध प्लाटिंग के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
