गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने देशभर में छेड़ा जाएगा जनआंदोलन; गोहत्या पर केंद्रीय कानून की मांग को लेकर छह चरणों में अभियान..15 से 20 लाख संतों के दिल्ली पहुंचने की तैयारी!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने और गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध के लिए केंद्रीय कानून बनाने की मांग को लेकर देशभर में छह चरणों का व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। अभियान के तहत प्रार्थना पत्र, हस्ताक्षर अभियान, जनसंपर्क, जिला मुख्यालयों पर कार्यक्रम, दिल्ली में चरणबद्ध आंदोलन और उपवास जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अभियान से जुड़े भरत महाराज ने कहा कि गौहत्या रोकने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की भी है। जब देश का समाज एकजुट होकर अपनी मांग सरकार तक पहुंचाएगा, तभी इस दिशा में निर्णायक परिणाम सामने आएगा। भरत महाराज ने कहा कि गौहत्या पर प्रतिबंध की मांग आजादी के समय से उठती रही है। महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल ने भी गौहत्या पर रोक के लिए कानून की आवश्यकता पर जोर दिया था। वर्ष 1964 और 1966 में साधु-संतों के नेतृत्व में बड़े आंदोलन हुए। वर्ष 1966 में करपात्री जी महाराज के नेतृत्व में हुए आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई में कई साधु-संतों की मौत हुई, जिसके बाद आंदोलन कमजोर पड़ गया। वर्ष 2016 में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली। उन्होंने कहा कि इस बार संत समाज ने आंदोलन के बजाय प्रार्थना, जनजागरण और लोकतांत्रिक तरीके से अभियान चलाने का निर्णय लिया है। अभियान के माध्यम से देश के हर वर्ग को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। उनका कहना है कि सरकार को अकेले जिम्मेदार ठहराने के बजाय समाज को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। यदि समाज अपनी मांग को संगठित और देशव्यापी तरीके से सरकार तक नहीं पहुंचाएगा तो सरकार पर प्रभावी दबाव कैसे बनेगा।
सभी समुदायों को जोड़ने का दावा…..
भरत महाराज ने कहा कि गौमाता किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं हैं। अभियान में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सहित सभी समुदायों के लोगों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई मुस्लिम समाज के लोगों और धर्मगुरुओं ने भी गौहत्या बंद करने और गौमाता के सम्मान की बात कही है। उन्होंने कहा कि गौवंश संरक्षण केवल धार्मिक विषय नहीं, बल्कि पर्यावरण और प्रकृति से भी जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।
केंद्रीय चरागाह नीति बनाने की मांग……
सड़कों पर घूमने वाले गौवंश की समस्या पर उन्होंने केंद्र सरकार से केंद्रीय चरागाह नीति बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि गौवंश के लिए पर्याप्त चारा, सुरक्षित आश्रय और चरागाह उपलब्ध कराना जरूरी है। सरकार गोधाम और अन्य आधारभूत संरचनाएं विकसित कर सकती है, लेकिन इनके संचालन में संत समाज, सामाजिक संगठनों और गौसेवा से जुड़े अनुभवी लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
छह चरणों में चलेगा अभियान…..
अभियान के पहले चरण में 27 अप्रैल 2026 को देशभर के जिला मुख्यालयों से प्रार्थना पत्र सौंपे गए और करीब पांच करोड़ हस्ताक्षर केंद्र सरकार तक पहुंचाए जाने का दावा किया गया है। दूसरे चरण में 27 जुलाई 2026 को देशभर के जिला मुख्यालयों से दोबारा प्रार्थना पत्र सौंपे जाएंगे। इस चरण में 15 करोड़ हस्ताक्षर जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। तीसरा चरण 27 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा, जिसमें 20 करोड़ हस्ताक्षर जुटाने की योजना है। इस तरह पहले तीन चरणों में 40 से 45 करोड़ हस्ताक्षर केंद्र सरकार तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। यदि इन चरणों के बाद भी मांग पूरी नहीं होती है तो 27 फरवरी 2027 से चौथा चरण शुरू किया जाएगा। इसके तहत देशभर के विभिन्न जिलों से लोगों को दिल्ली बुलाकर प्रतिदिन लाखों प्रार्थना पत्र लिखकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचाए जाएंगे। यह अभियान चरणबद्ध तरीके से करीब छह महीने तक चलाने की योजना है। भरत महाराज के अनुसार, 15 अगस्त 2027 तक चार चरणों के बाद भी मांग पूरी नहीं होने पर 16 अगस्त 2027 से पांचवां चरण शुरू किया जाएगा। इसमें देशभर से 15 से 20 लाख संतों और श्रद्धालुओं के दिल्ली पहुंचने तथा नौ दिनों तक उपवास करने की योजना है। उन्होंने कहा कि पांच चरणों के बाद भी यदि सरकार मांग पर निर्णय नहीं लेती है तो छठे और अंतिम चरण में देशभर के संत, सामाजिक संगठन, प्रबुद्धजन, मातृशक्ति संगठन और विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि मिलकर आगे की रणनीति तय करेंगे। अभियान का उद्देश्य शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से गौमाता के संरक्षण, उन्हें राष्ट्रमाता का दर्जा देने और गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध के लिए केंद्रीय कानून बनाने की मांग को केंद्र सरकार तक पहुंचाना है।
