बिलासपुर के नोबल अस्पताल पर लापरवाही का आरोप; ऑपरेशन के अगले ही दिन मरीज की मौत, परिजनों ने मचाया हंगामा..कार्यवाहीं की मांग!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) शहर के गौरव पथ रिंग रोड क्रमांक-2 स्थित नोबल हॉस्पिटल में रविवार को एक मरीज की मौत के बाद जमकर विवाद हो गया। मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए हंगामा किया और उपचार में देरी, रेफर नहीं करने तथा ऑपरेशन के बाद उचित देखभाल नहीं मिलने की बात कही। वहीं अस्पताल प्रबंधन ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए इलाज को नियमानुसार बताया। प्राप्त जानकारी के अनुसार सकरी थाना क्षेत्र के ग्राम भिलौनी (काठाकोनी) निवासी अजय ताम्रकार (36 वर्ष), पिता मनहरण ताम्रकार, नगर निगम बिलासपुर में सफाई कर्मचारी थे। परिजनों के मुताबिक 15 जुलाई को घर लौटते समय बाइक से गिरने के कारण उनके कंधे के पास गंभीर चोट आई थी। इसके बाद 16 जुलाई को उन्हें नोबल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। परिजनों का आरोप है कि जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि कंधे की हड्डी टूट गई है और खून का थक्का जमा है, जिसके लिए ऑपरेशन जरूरी है। उनका कहना है कि 17 जुलाई को ऑपरेशन होना था, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने भारी बारिश का हवाला देकर ऑपरेशन टाल दिया। इतना ही नहीं, जब उन्होंने मरीज को दूसरे अस्पताल रेफर करने की बात कही तो कथित रूप से आर्थिक कारणों का हवाला देते हुए रेफर भी नहीं किया गया। परिजनों के अनुसार 18 जुलाई को मरीज का ऑपरेशन किया गया, जो करीब सात घंटे तक चला। उनका आरोप है कि ऑपरेशन से पहले डॉक्टरों ने मरीज को शुगर, बीपी या किसी अन्य गंभीर बीमारी की जानकारी नहीं दी। उनका कहना है कि ऑपरेशन से पहले अजय सामान्य रूप से चल-फिर रहे थे, लेकिन ऑपरेशन के अगले दिन सुबह अस्पताल ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मरीज की मौत की सूचना मिलते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। मृतक की पत्नी और लिया मनहरण ताम्रकार ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
डॉ. बी. यादव राव ने क्या कहा…..
नोबल हॉस्पिटल के डॉ. बी. यादव राव ने परिजनों के आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि मरीज के कंधे की हड्डी में फ्रैक्चर था। ऑपरेशन दोपहर करीब 2:30 बजे शुरू हुआ और शाम करीब 6 बजे सफलतापूर्वक पूरा हो गया। उन्होंने बताया कि जिस समय ऑपरेशन होना था, उस दौरान बिजली आपूर्ति बाधित थी। बिजली के बिना ऑपरेशन करना संभव नहीं था, इसलिए प्रक्रिया में विलंब हुआ। डॉ. राव के अनुसार ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति सामान्य थी और परिजनों को भी उससे मिलने दिया गया था। उन्होंने कहा कि मरीज को पहले से सीने संबंधी कोई समस्या रही हो सकती है, जिसके कारण उसकी मृत्यु हुई। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन परिजनों की लिखित सहमति के बाद ही किया गया था।
