बिलासपुर; फीस नहीं देने पर परीक्षा से रोका, टीसी भी नहीं दी; महर्षि विद्या मंदिर को शिक्षा विभाग का नोटिस..सीएम हेल्पलाइन की शिकायत पर बीईओ की कार्रवाई, ‘सीबीएसई पैटर्न’ और महंगी किताबें खरीदने के आरोपों की भी होगी जांच!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) शहर के राजेंद्र नगर स्थित महर्षि विद्या मंदिर निजी प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शाला कथित अनियमितताओं और मनमानी के आरोपों को लेकर शिक्षा विभाग के रडार पर आ गई है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत के बाद विकासखंड शिक्षा अधिकारी बिल्हा ने विद्यालय प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी कर बिंदुवार स्पष्टीकरण मांगा है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब और आवश्यक दस्तावेज निर्धारित समय में प्रस्तुत नहीं किए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। शिकायतकर्ता विवेक जी ने आरोप लगाया है कि आर्थिक तंगी के कारण फीस बकाया रहने पर विद्यालय प्रबंधन ने उनकी दो बेटियों को वार्षिक परीक्षा में शामिल होने से रोक दिया। इनमें एक छात्रा नर्सरी और दूसरी कक्षा छठवीं की छात्रा है। अभिभावक का कहना है कि उन्होंने किस्तों में फीस जमा करने का अनुरोध किया था, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने इसे स्वीकार नहीं किया। शिकायत के अनुसार 27 जून 2026 को स्थानांतरण प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन देने के बावजूद बकाया फीस का हवाला देकर टीसी जारी नहीं की गई। इससे दोनों छात्राओं का दूसरे विद्यालय में प्रवेश प्रभावित हुआ। शिकायत में विद्यालय की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि राज्य शासन से मान्यता प्राप्त होने के बावजूद विद्यालय स्वयं को अभिभावकों के सामने “सीबीएसई पैटर्न” का बताकर प्रस्तुत करता है। साथ ही, शासन द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाने वाली पुस्तकों के स्थान पर निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने का दबाव बनाया जाता है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि केवल नर्सरी और छठवीं कक्षा की पुस्तकों पर ही अभिभावकों से 16 से 17 हजार रुपये तक खर्च कराया जाता है। इसके अलावा अभिभावकों को एक निर्धारित दुकान से किताबें और दूसरी तय दुकान से यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। मामले को गंभीर मानते हुए बीईओ बिल्हा ने विद्यालय प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही संकुल प्राचार्य एवं संकुल समन्वयक, राजेंद्र नगर को मौके पर जांच कर दो दिनों के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि विद्यालय प्रबंधन का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो शिक्षा का अधिकार अधिनियम तथा छत्तीसगढ़ निजी विद्यालय फीस विनियमन अधिनियम-2020 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है। विद्यालय प्रबंधन का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने और सभी तथ्यों के परीक्षण के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
