बिलासपुर में कलेक्टर के आदेश को ठेंगा दिखा रहे अफसर; रातभर गूंजती रही बोरिंग मशीन की आवाज, जिम्मेदार ‘पारिवारिक कारणों’ और ‘क्षेत्राधिकार’ का बहाना बनाकर सोते रहे!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) जिले में भीषण गर्मी और तेजी से गिरते जलस्तर को देखते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल ने सख्त रुख अपनाते हुए 31 जून तक पूरे जिले में बोर खनन पर कड़ा प्रतिबंध लगा रखा है। कलेक्टर ने साफ शब्दों में चेतावनी दी थी कि आदेश का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन बिलासपुर के जिम्मेदार अफसरों की सुस्ती और संवेदनहीनता देखिए कि उन्हें न तो जनता की तकलीफों से कोई सरोकार है और न ही अपने शीर्ष अधिकारी के आदेशों का कोई खौफ। कलेक्टर का यह सख्त आदेश अब सिर्फ कागजी फरमान बनकर रह गया है, क्योंकि जमीनी स्तर पर बैठे अधिकारी खुद ही इस आदेश की धज्जियां उड़वाने में मददगार साबित हो रहे हैं। ताजा और बेहद शर्मनाक मामला शुक्रवार की रात का है, जिसने प्रशासनिक मुस्तैदी के दावों की पोल खोलकर रख दी है। महाराणा प्रताप चौक क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्रीन पार्क कॉलोनी में शुक्रवार रात 11 बजे से लेकर शनिवार की सुबह होने तक धड़ल्ले से अवैध बोर खनन चलता रहा। पूरी रात मशीनें गरजती रहीं और कॉलोनी के लोग परेशान होते रहे। जब जागरूक रहवासियों ने पानी की किल्लत और गिरते जलस्तर का हवाला देते हुए क्षेत्र के जिम्मेदार राजस्व अधिकारी, तहसीलदार प्रकाश साहू को फोन पर इसकी सूचना दी, तो साहब ने कार्रवाई करने के बजाय ‘पारिवारिक कारणों’ का रोना रो दिया। हद तो तब हो गई जब लोगों ने कानून व्यवस्था संभालने वाले थाना प्रभारी किशोर केवट से संपर्क किया, तो उन्होंने इसे ‘राजस्व विभाग का मामला’ बताकर पल्ला झाड़ लिया और बाद में जनता का फोन उठाना ही बंद कर दिया। हैरानी की बात यह है कि जब बिलासपुर की जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है, तब प्रतिबंध के बावजूद KA-01-MJ-6575 और KA-28-B-5499 नंबर की भारी-भरकम बोरिंग गाड़ियां बेखौफ होकर रिहायशी इलाके में घुसती रही और पूरी रात अधिकारियों की नाक के नीचे अवैध खनन करती रही। जनता अब यह पूछने पर मजबूर है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और शिकायत करने पर भी अफसर कुंभकर्णी नींद से न जागें, तो आखिर कलेक्टर के आदेश का पालन कौन कराएगा? क्या इन लापरवाह अफसरों पर कलेक्टर साहब कोई हंटर चलाएंगे या फिर रसूखदारों के आगे बेबस होकर बिलासपुर की जनता को इसी तरह बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने और अनिद्रा की काली रातें काटने के लिए छोड़ दिया जाएगा?
