बिलासपुर; पर्यावरण दिवस पर बिलासपुर के अरपा नदी में अवैध खनन का मामला उजागर: खनिज विभाग के कार्यालय से कुछ दूरी पर चलता रहा अवैध कारोबार, अफसरों के फोन बंद..अरपा बचाने के दावे फेल, नदी लूटते रहे माफिया!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) विकास के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाकर अपनी पीठ थपथपाने वाले बिलासपुर जिला प्रशासन की असलियत एक बार फिर उजागर हो गई है। शहर की जीवनदायिनी अरपा नदी को संवारने के खोखले वादे और फाइलों में तैरते सौंदर्यकरण के बड़े-बड़े प्रोजेक्ट महज एक दिखावा साबित हो रहे हैं, क्योंकि जिन कंधों पर इस धरोहर को बचाने का जिम्मा है, वे खुद रेत माफिया के सामने नतमस्तक हो चुके हैं। बिलासपुर के सबसे वीआईपी इलाके में रेत माफिया का आतंक इस कदर पैर पसार चुका है कि अब उन्हें न तो कानून का डर है और न ही खाकी का खौफ। शासन-प्रशासन की आंखें इस कदर बंद हैं कि माफिया रात के सन्नाटे में, बिलासपुर कलेक्ट्रेट के ठीक सामने से बेखौफ होकर नदी का सीना चीर रहे हैं। कलेक्ट्रेट के भीतर ही खनिज विभाग का दफ्तर है और वहां से महज एक किलोमीटर की दूरी पर अरपा नदी को छलनी किया जा रहा है, लेकिन मजाल है कि किसी अधिकारी की नींद टूट जाए। इस अंधे बहरे तंत्र को देखकर अब शहर में यह बात खुलकर होने लगी है कि रेत माफियाओं द्वारा पहुंचाई जाने वाली मोटी रकम ने शायद इन बड़े साहबों की जुबान और आंखें दोनों पर परमानेंट ताला लगा दिया है, तभी तो बिलासपुर की नाक के नीचे यह काला खेल बिना किसी रुकावट के फल-फूल रहा है। इस प्रशासनिक नपुंसकता का सबसे ताजा और शर्मनाक उदाहरण विश्व पर्यावरण दिवस यानी 5 जून की अलसुबह देखने को मिला, जब पूरा देश पर्यावरण बचाने के ढोंग में डूबा था, तब बिलासपुर में अरपा को उजाड़ा जा रहा था। जैसे ही 4 जून की रात के 12 बजे, माफियाओं की पूरी फौज दर्जनों ट्रैक्टर लेकर शिव घाट बैराज की ओर से सीधे नदी के भीतर दाखिल हो गई। यह वही संवेदनशील इलाका है जहां ‘न्यू रिवर व्यू’ के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये फूंककर सौंदर्यकरण का तमाशा किया जा रहा है। इसी तथाकथित वीआईपी प्रोजेक्ट के ठीक बगल में नदी के भीतर माफियाओं ने अपने ट्रैक्टर खड़े किए, पकड़े जाने के डर से गाड़ियों की हेडलाइट्स बंद कीं और अंधेरे का फायदा उठाकर दर्जनों मजदूरों की मदद से रेत की भराई शुरू कर दी गई। रात 12 बजे से लेकर सुबह के 4 बजे तक अरपा नदी के भीतर ट्रैक्टरों का मेला लगा रहा, गाड़ियां आती-जाती रहीं और बिलासपुर का वैभव कही जाने वाली नदी को खोखला किया जाता रहा, लेकिन इस पूरे चार घंटे के तांडव के दौरान कलेक्ट्रेट में बैठी सरकार गहरी नींद में सोती रही। हैरानी और शर्म की बात तो यह है कि जब रेत माफिया अरपा की अस्मत लूट रहे थे, तब रफ्तार न्यूज़ की टीम ग्राउंड जीरो पर अपनी जान जोखिम में डालकर इस महाघोटाले का लाइव रियलिटी चेक कर रही थी। हमारी टीम की आंखों के सामने यह पूरी अवैध उगाई चलती रही और जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो टीम ने बिलासपुर के मुखिया यानी कलेक्टर संजय अग्रवाल और खनिज विभाग के उप संचालक किशोर गोलघाटे के मोबाइल पर लगातार कॉल घनघनाए। अधिकारियों को इसलिए फोन किया गया ताकि वे नींद से जागें और अपनी आंखों के सामने हो रही इस डकैती को रोक सकें, लेकिन इन दोनों ही जिम्मेदार अधिकारियों ने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा। वीआईपी कल्चर में जीने वाले और मोटी तनख्वाहें डकारने वाले इन अफसरों का यह रवैया साफ दिखाता है कि रेत माफिया के इस खेल में ऊपर से लेकर नीचे तक सबकी रजामंदी शामिल है। विश्व पर्यावरण दिवस के पावन मौके पर बिलासपुर कलेक्टर और माइनिंग विभाग की यह कुंभकर्णी नींद और फोन न उठाने का रवैया यह साबित करने के लिए काफी है कि बिलासपुर में कानून का नहीं, बल्कि रेत माफिया का राज चल रहा है और अफसर सिर्फ मूकदर्शक बनकर अपनी जेबें गर्म करने में मसरूफ हैं।
