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विश्व पर्यावरण दिवस विशेष; बिलासपुर के ‘अनदेखे प्रहरी’ हैं ये रंग-बिरंगे कीट-पतंगे..परागण से लेकर जैविक संतुलन तक निभा रहे अहम भूमिका, जैव-विविधता पर पीएचडी स्कॉलर सूची ठाकुर का बड़ा शोध!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) आमतौर पर जब हम पर्यावरण संरक्षण की बात करते हैं, तो हमारा ध्यान बड़े पेड़ों, जंगलों और नदियों पर ही जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिलासपुर के पर्यावरण को सांसें देने में पैरों तले रेंगने वाले और हवा में उड़ने वाले नन्हे कीट-पतंगे भी उतनी ही बड़ी भूमिका निभा रहे हैं? अमूमन लोग कीट-पतंगों को केवल फसलों या घरों को नुकसान पहुंचाने वाले जीव के रूप में देखते हैं, लेकिन पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को बनाए रखने में इनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सामने आए शोध तथ्यों के अनुसार बिलासपुर शहर और आसपास के क्षेत्रों में पाए जाने वाले तितलियां, मधुमक्खियां, भौंरे, ड्रैगन फ्लाई और अन्य कीट-पतंगे प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इनकी उपस्थिति स्वस्थ पर्यावरण और समृद्ध जैव विविधता का संकेत मानी जाती है। पीएचडी स्कॉलर सूची ठाकुर बिलासपुर क्षेत्र में कीट-पतंगों की विविधता और उनके पर्यावरणीय योगदान पर शोध कर रही हैं। उनके अनुसार शहर के उद्यानों, तालाबों, कृषि क्षेत्रों और हरित पट्टियों में पाए जाने वाले अनेक कीट पौधों के परागण में मदद करते हैं, जिससे फूलों और फसलों का उत्पादन बढ़ता है। वहीं कुछ कीट हानिकारक जीवों की संख्या नियंत्रित कर प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला को संतुलित बनाए रखते हैं।

शहरीकरण और रासायनिक कीटनाशकों से प्रभावित हो रहे कीट-पतंगे…..

शोधकर्ता सूची ठाकुर बताती हैं कि बिलासपुर में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, कंक्रीट के बढ़ते जाल और कृषि व बागवानी में रासायनिक कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग से कई लाभकारी कीटों की संख्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है। यदि इनके संरक्षण के लिए समय रहते जागरूकता नहीं बढ़ाई गई, तो इसका सीधा असर स्थानीय जैव विविधता और कृषि उत्पादन दोनों पर पड़ सकता है। इन नन्हे जीवों का घटना हमारे पूरे इकोसिस्टम के लिए एक खतरे की घंटी है।

कीट-पतंगों के 5 बड़े पर्यावरणीय लाभ……

. फूलों और फसलों के परागण में मदद कर वनस्पति जगत को जीवन देते हैं।

. फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक कीटों की संख्या को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करते हैं।

. पक्षियों, मेंढकों, छिपकलियों और अन्य जीवों के लिए भोजन का मुख्य स्रोत हैं।

. जैविक अपशिष्ट (सूखे पत्ते, मृत अवशेष) के विघटन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

. ये पर्यावरण में होने वाले बदलावों के सटीक संकेतक के रूप में कार्य करते हैं।

वर्जन; सूची ठाकुर, पीएचडी स्कॉलर, बिलासपुर

कीट-पतंगे केवल छोटे जीव नहीं हैं, बल्कि हमारे पारिस्थितिकी तंत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इनके संरक्षण से ही बिलासपुर की स्थानीय जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत बनाया जा सकता है।

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