बिलासपुर के इस थाने में VIP ट्रीटमेंट के बाद ‘साहब’ बना कबाड़ कारोबारी; पुलिसकर्मी बने सेवक..कप्तान के आदेश की उड़ी धज्जियां, कार्रवाई या मेहमाननवाजी? तस्वीर ने मचाया हड़कंप..कार्रवाई के नाम पर नौटंकी?..खाकी पर उठे बड़े सवाल!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) न्यायधानी में खाकी का इकबाल किस कदर जमींदोज हो चुका है, इसकी एक शर्मनाक बानगी कोनी थाने में देखने को मिली है। जहां एक तरफ आम फरियादी थाने के चक्कर काट-काटकर चप्पलें घिस देता है, वहीं दूसरी तरफ कानून को ठेंगे पर रखने वाले अपराधियों के लिए थाने के भीतर रेड कार्पेट बिछाया जा रहा है। ताजा मामला पुलिस और कबाड़ माफिया के बीच के उस ‘अपवित्र गठबंधन’ को उजागर करता है, जिसकी बदौलत शहर में अवैध धंधे फल-फूल रहे हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक तस्वीर ने बिलासपुर पुलिस की कार्यप्रणाली को पूरी तरह नंगा कर दिया है। कायदे से जिस अपराधी की जगह जमीन पर या हवालात के भीतर होनी चाहिए, वह कोनी थाने के भीतर साहबों की तरह मेज पर हाथ टिकाए, आलीशान तरीके से कुर्सी पर बैठकर चाय की चुस्कियां ले रहा है। उसके सामने दो पुलिसकर्मी इस कदर नतमस्तक बैठे हैं मानो वो किसी वीआईपी की खातिरदारी में तैनात हों। यह ‘खास मेहमान’ कोई और नहीं, बल्कि कोनी थाना क्षेत्र में अवतार पैलेस के सामने अवैध कबाड़ की दुकान चलाने वाला कुख्यात संचालक अकबर खान है।

चौंकाने वाली बात यह है कि दो दिन पहले ही बिलासपुर एसपी ने शहर में अवैध कबाड़ियों पर नकेल कसने और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। कप्तान के आदेश के बाद सालों से गहरी नींद में सोई कोनी पुलिस ने दिखावे के लिए जागने का नाटक तो किया और अकबर खान के खिलाफ 170 बीएनएस के तहत कार्रवाई की नौटंकी भी रची, लेकिन थाने लाते ही इस आरोपी को जो ‘स्पेशल ट्रीटमेंट’ मिला, उसने पुलिस की नीयत साफ कर दी। थाने के भीतर कबाड़ माफिया को यह राजा भोज वाला वीआईपी ट्रीटमेंट देने वाले कोई और नहीं, बल्कि प्रधान आरक्षक बालेश्वर तिवारी और आरक्षक अनुज जांगड़े हैं। बंद कमरों में चर्चा है कि यह खातिरदारी यूं ही मुफ्ती में नहीं हो रही है; शहर के प्रत्येक थाना क्षेत्र में कबाड़ दुकान संचालक हर महीने मोटी-मोटी रकम के बंडल फेंककर पुलिसकर्मियों की जेबें गर्म रखते हैं। इसी ‘महीने की बंधी ढीठ रकम’ के एवज में बिलासपुर के कोने-कोने में अवैध कबाड़ का काला कारोबार फल-फूल रहा है। जब इस शर्मनाक मामले को लेकर शहर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) पंकज पटेल से सीधा सवाल किया गया, तो उन्होंने हमेशा की तरह खाकी का बचाव करते हुए लपेटा मारते हुए कहा कि कबाड़ कारोबारी को केवल दस्तावेज चेक करने के लिए बुलाया गया था और उसकी दुकान सील की गई है। लेकिन साहब के इस लचर तर्क से जनता बेवकूफ नहीं बनने वाली। सवाल यह उठता है कि क्या दस्तावेज चेक कराने आने वाले हर आम नागरिक को बिलासपुर पुलिस इसी तरह थाने में बिठाकर गरम चाय की चुस्कियां लगवाती है? कप्तान के सख्त रवैये पर उनके ही मातहत किस कदर पानी फेर रहे हैं और चंद रुपयों के लिए खाकी की गरिमा को कबाड़ के भाव बेच रहे हैं, यह तस्वीर उसका पुख्ता सबूत है। अब देखना यह है कि इस कबाड़ माफिया के सामने रीढ़विहीन हो चुके इन पुलिसकर्मियों पर बिलासपुर एसपी क्या हंटर चलाते हैं, या फिर यह मामला भी ‘जांच के नाम पर’ ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

