सीपत; 200 मौतें डकार चुकी ‘खूनी सड़क’ पर कब जागेगा प्रशासन? सीपत-बलौदा मार्ग पर 20 करोड़ के टेंडर के बाद भी पसरा सन्नाटा, भड़के ग्रामीणों ने दी 16 मई से चक्काजाम की दो-टूक चेतावनी!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) जिले के सीपत से बलौदा मार्ग पर बिछती इंसानी लाशों और धूल उड़ाते गड्ढों ने अब ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। 20 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि स्वीकृत होने और टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद फाइलें दबाकर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों को आईना दिखाने के लिए सोमवार को सरपंच संघ और ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट का घेराव कर दिया। सीपत से लेकर कुली स्थित लीलगर नदी तक की यह 14 किलोमीटर लंबी सड़क अब आम रास्ता नहीं बल्कि ‘यमराज का घर’ बन चुकी है। ग्रामीणों ने बेहद तल्ख लहजे में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए अल्टीमेटम दिया है कि यदि 15 मई तक सड़क का निर्माण कार्य धरातल पर शुरू नहीं हुआ, तो 16 मई से इस मार्ग पर भारी वाहनों के पहिए पूरी तरह थाम दिए जाएंगे और अनिश्चितकालीन चक्काजाम किया जाएगा। इस बदहाल सड़क की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जर्जर हालत की वजह से अब तक यहाँ 200 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। हालात इतने बदतर हैं कि हर दिन दो से तीन राहगीर इन जानलेवा गड्ढों में गिरकर लहूलुहान हो रहे हैं। सीपत सरपंच संघ के अध्यक्ष शैलेंद्र खांडेकर के नेतृत्व में पहुंचे ग्रामीणों ने साफ किया कि यह मार्ग आसपास के 25 गांवों के लिए जीवनरेखा है, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही ने इसे ‘डेथ-लाइन’ में तब्दील कर दिया है। सवाल यह उठता है कि जब बजट पास हो चुका है और टेंडर की औपचारिकताएं पूरी हो गई हैं, तो आखिर किसके संरक्षण में ठेकेदार और विभाग काम शुरू करने से कतरा रहे हैं? क्या प्रशासन को अभी और मौतों का इंतजार है? परेशान ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने कड़े शब्दों में कहा कि शासन-प्रशासन जनता के धैर्य की परीक्षा न ले। अब तक की गई शिकायतों को ठंडे बस्ते में डालने वाले अफसरों को चेताते हुए ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि 15 मई तक अगर मशीनें सड़क पर नहीं उतरीं, तो पूरा क्षेत्र 16 मई से उग्र आंदोलन की राह पर होगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की होगी।
