VIDEO; लिंगयाडीह आंदोलन 62वें दिन भी अडिग, चित्रकांत श्रीवास की अगुवाई में तेज हुआ जनदबाव..नेताओं-समाजसेवियों की एकजुटता से सरकार पर बढ़े सवाल!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) लिंगयाडीह क्षेत्र में चल रहा जनआंदोलन 62वें दिन भी पूरी मजबूती और जनसमर्थन के साथ जारी है। दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद मांगों पर कोई ठोस निर्णय न होने से आंदोलनकारियों में रोष गहराता जा रहा है। अब यह आंदोलन केवल स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि जनअधिकारों की निर्णायक लड़ाई का रूप ले चुका है। आंदोलन को निर्णायक दिशा देते हुए वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता चित्रकांत श्रीवास खुलकर मैदान में उतर आए हैं। उन्होंने आंदोलन स्थल से स्पष्ट शब्दों में कहा कि लिंगयाडीह का यह संघर्ष जनता की पीड़ा और जनभावनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति है। सरकार की चुप्पी अब अस्वीकार्य है। यदि जनहित की मांगों की अनदेखी जारी रही, तो आंदोलन और व्यापक रूप लेगा। चित्रकांत श्रीवास की इस मुखर भूमिका के बाद आंदोलन को नई धार मिली है। उनके समर्थन से आम नागरिकों, युवाओं और सामाजिक संगठनों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में आशीष गोयल ने आंदोलन को न्याय और अधिकारों की लड़ाई बताते हुए कहा कि जनता का धैर्य अब जवाब मांग रहा है। अल्पसंख्यक समाज की ओर से आसिफ खान ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि जनता की आवाज़ को लगातार नजरअंदाज करना लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। वहीं राजू खटीक ने आंदोलन की निरंतरता को जनता के संकल्प और संघर्षशील चेतना का प्रतीक बताया। आंदोलन को समर्थन देने वालों में कमलेश दुबे, श्याम मूरत कौशिक और डॉ. रघु साहू भी शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि लिंगयाडीह का मुद्दा अब पूरे समाज के सम्मान और अधिकार से जुड़ चुका है। आंदोलन स्थल पर लगातार बढ़ती भीड़, सभाएं और जनभागीदारी यह साफ संकेत दे रही है कि यदि शासन-प्रशासन ने शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की, तो यह आंदोलन और उग्र तथा व्यापक रूप ले सकता है। आंदोलनकारियों ने दो टूक कहा है कि जब तक हमारी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जाएगा, तब तक संघर्ष की यह आवाज़ और तेज होती जाएगी।


















