बिलासपुर; 11 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेशभर में हड़ताल, सरकारी दफ्तरों पर ताले….

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) सरकारी विभागों के कर्मचारियों ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के पहले ही दिन इसका व्यापक असर देखने को मिला। कलेक्ट्रेट समेत अधिकांश सरकारी दफ्तरों में सन्नाटा पसरा रहा और कामकाज पूरी तरह ठप रहा। जरूरी काम से दफ्तर पहुंचे लोग इधर-उधर भटकते नजर आए। हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने बिलासपुर के नेहरू चौक पर एकत्र होकर धरना-प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से शासन का ध्यान आकर्षित कर रहे थे, लेकिन बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। शासन के इसी रवैये से कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। कर्मचारियों ने साफ किया कि यह हड़ताल सोमवार से बुधवार तक जारी रहेगी। पहले ही दिन कलेक्ट्रेट और अन्य सरकारी कार्यालयों में कर्मचारी अनुपस्थित रहे, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई लोगों ने बताया कि वे कई दिनों से अपने काम के लिए चक्कर काट रहे थे, लेकिन अब हड़ताल के कारण उनका काम और अटक गया है। धरना स्थल पर नेताओं ने पुरानी पेंशन योजना को लेकर कहा कि यह कर्मचारियों के बुढ़ापे का सहारा है, जिसे बंद कर दिया गया है। इसे तत्काल बहाल किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शासन की ओर से सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और बेमियादी हड़ताल की राह अपनाई जाएगी।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं….
1. पुरानी पेंशन योजना को तुरंत लागू किया जाए।
2. संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का नियमितीकरण हो।
3. लंबित महंगाई भत्ते के एरियर का नकद भुगतान किया जाए।
4. सातवें वेतन आयोग की वेतन विसंगतियों का निराकरण किया जाए।
5. सभी रिक्त पदों पर स्थायी भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।
6. कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा कार्ड की सुविधा मिले।
7. प्रचार पर लगी रोक हटाकर समय पर प्रचार किया जाए।
8. आउटसोर्सिंग प्रथा समाप्त कर सीधी भर्ती की जाए।
9. महिला कर्मचारियों के लिए चाइल्ड केयर लीव को सरल बनाया जाए।
10. सेवाकाल में मृत कर्मचारियों के आश्रितों को तत्काल नियुक्ति दी जाए।
11. तबादला नीति को पारदर्शी और कर्मचारी हितैषी बनाया जाए।
कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
