तेंदवे की हत्या, दूसरे जगह शिकार कर जंगल लाकर छोड़ने की आशंका……

छत्तीसगढ़: (प्रांशु क्षत्रिय) खैरागढ़-डोंगरगढ़ अंचल के जंगलों में जैव विविधता पर संकट गहराता जा रहा है। वन विभाग की कमजोर निगरानी के बीच अवैध घुसपैठ और शिकार की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ताजा और बेहद चिंताजनक मामला वन ग्राम बनबोड़ क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक वयस्क तेंदुए की निर्ममता से हत्या कर दी गई। सोमवार सुबह खैरागढ़ वनमंडल के कोपेनवागांव–मुढ़ीपार क्षेत्र में राजस्व भूमि पर तेंदुए का शव संदिग्ध हालात में मिला। ग्रामीणों ने शव देख तुरंत वन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद विभागीय अमला मौके पर पहुंचा और जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि तेंदुए के चारों पैरों के नाखून, पंजे और जबड़े के दांत काटकर ले जाए गए हैं। यह संकेत साफ तौर पर संगठित अवैध शिकार की ओर इशारा करता है। घटनास्थल के आसपास खून के धब्बे भी मिले हैं, जिससे आशंका जताई जा रही है कि तेंदुए की हत्या कहीं और कर शव को यहां लाकर फेंका गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। क्षेत्र को सुरक्षा बलों के साथ सील कर दिया गया है और डॉग स्क्वायड को भी जांच में लगाया गया है। आसपास के गांवों में संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है। वन्यजीव संरक्षण नियमों के तहत तेंदुए का पोस्टमार्टम कराया गया है। वन विभाग का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। वन परिक्षेत्राधिकारी आर.के. टंडन ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर हर पहलू की गहन जांच की जा रही है और अवैध शिकार की पुष्टि होने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। तेंदुए की हत्या की खबर से इलाके में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते निगरानी व्यवस्था मजबूत नहीं की गई, तो खैरागढ़-डोंगरगढ़ के जंगलों से वन्यजीवों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। स्थानीय लोगों ने वन विभाग से ठोस कार्रवाई और स्थायी निगरानी तंत्र लागू करने की मांग की है, ताकि जंगलों में बेखौफ घूम रहे शिकारियों पर प्रभावी लगाम लगाई जा सके।


















