बिलासपुर; स्मार्ट सिटी ठगी, 441 करोड़ के लेन-देन और विदेशी निवेश का खुलासा, केके श्रीवास्तव केस में पुलिस की बड़ी चार्जशीट, महादेव सट्टा कनेक्शन तक पहुंचे जांच के धागे…..

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) छत्तीसगढ़ के चर्चित कथित तांत्रिक और पूर्व सीएम भूपेश बघेल के करीबी माने जाने वाले कृष्ण कुमार श्रीवास्तव उर्फ केके के खिलाफ तेलीबांधा पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। लंबे समय से सुर्खियों में चल रहे इस मामले में कई नए खुलासे हुए हैं।
विदेशों में करोड़ों का निवेश, हवाला का इस्तेमाल…..
पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक केके और उसका बेटा कंचन चीन और ऑस्ट्रेलिया में भारी भरकम रकम निवेश कर चुके हैं। यह पैसा हवाला के जरिए भेजा गया। दोनों के बैंक खातों की जांच में 441 करोड़ रुपये के लेन-देन का रिकॉर्ड मिला है। फॉरेंसिक जांच में यह भी सामने आया कि दोनों ने ऑनलाइन सट्टा एप महादेव बुक से जुड़ी मेस्टिजिक कंपनी में भी निवेश किया है।
स्मार्ट सिटी के नाम पर 15 करोड़ की ठगी…..
चार्जशीट के अनुसार पिछली सरकार के दौरान बिलासपुर निवासी केके बेहद प्रभावशाली बन गया था। इसी प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए उसने नोएडा की रावत एसोसिएट कंपनी के मालिक अर्जुन सिंह को ‘स्मार्ट सिटी’ प्रोजेक्ट में 500 करोड़ का ठेका दिलाने का झांसा दिया और 15 करोड़ रुपये ले लिए। रकम अलग-अलग पांच खातों में ट्रांसफर कराई गई, जिनमें से तीन खाते बिलासपुर के अब्बास अली के नाम पर थे, जो केके के लिए काम करता था। कुछ पैसे लौटाने के बाद बाकी रकम खुद खर्च कर ली गई। एफआईआर दर्ज होने के बाद केके और उसका बेटा कंचन फरार हो गए थे। जांच में पता चला कि युवा कांग्रेस नेता आशीष शिंदे ने अपनी कार CG 04 PP 0007 में केके को छिपाकर नागपुर पहुंचाया। वहां कुछ दिन रुकने के बाद दोनों दिल्ली चले गए। करीब एक महीने तक छिपे रहने के बाद केके भोपाल पहुंचा, जहां से पुलिस ने 24 जून को उसे गिरफ्तार कर लिया। शिंदे को आरोपी की मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। चार्जशीट में कंचन और अब्बास अली को फरार बताया गया है, जबकि कंचन को कई बार रायपुर और बिलासपुर में देखा गया। पुलिस ने उसे बनारस से हिरासत में भी लिया था, लेकिन पूछताछ के बाद छोड़ दिया। चार्जशीट में मनी लॉन्ड्रिंग और महादेव सट्टा कनेक्शन का भी जिक्र है। रिपोर्ट ईडी और सीबीआई को भेज दी गई है। सूत्रों का दावा है कि सीबीआई दिसंबर में पहली चार्जशीट दाखिल कर सकती है, जिसमें गिरफ्तार आईपीएस और रापुसे अधिकारियों को राहत मिलने की संभावना है।
