सीपत; शहीद वीरेंद्र कैवर्त की उपेक्षा पर पूर्व सैनिक और समाज में आक्रोश, नरगोड़ा में प्रतिमा व स्मारक बनाने की मांग…15 सितंबर को मनाया जाएगा शहादत दिवस!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) जिले के वीर सपूत शहीद वीरेंद्र कैवर्त की शहादत को लेकर पूर्व सैनिकों और मछुआ समाज ने उपेक्षा पर गहरी पीड़ा जताई है। शुक्रवार को आन पूर्व सैनिक कल्याण संगठन बिलासपुर और जिला मछुआ समाज ने संयुक्त रूप से प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता कर शासन-प्रशासन से स्मारक निर्माण और सम्मानजनक पहल की मांग की। संगठन के अध्यक्ष दत्तात्रेय यादव ने बताया की शहीद वीरेंद्र कैवर्त भारतीय सेना की 225वीं मीडियम रेजिमेंट में सेवारत थे और 62 राष्ट्रीय राइफल में डेपुटेशन पर थे। 15 सितंबर 2006 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रेबन गांव में आतंकवाद सर्चिंग अभियान के दौरान आईईडी ब्लास्ट में वे शहीद हो गए। तब से लेकर पिछले 19 वर्षों से नरगोड़ा (सीपत) में प्रतिवर्ष उनकी शहादत दिवस मनाई जाती है। यादव ने कहा कि शासन और जिला प्रशासन की ओर से अब तक शहीद को उचित सम्मान नहीं दिया गया है। उन्होंने मांग की कि गृह ग्राम नरगोड़ा में शहीद की प्रतिमा स्थापित कर स्मारक बनाया जाए और किसी सरकारी स्कूल अथवा खेल मैदान का नाम शहीद वीरेंद्र कैवर्त के नाम पर रखा जाए। जिला निषाद समाज के अध्यक्ष हर प्रसाद निषाद ने कहा की समाज को गर्व है की शहीद वीरेंद्र कैवर्त ने देश के लिए प्राण न्यौछावर किए। उन्होंने कहा की बिलासा दाई की धरती पर बसे इस शहर के लिए गौरव की बात है कि यहां का बेटा देश के लिए शहीद हुआ। शहादत नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन सके, इसके लिए स्मारक बनना आवश्यक है। लंबे समय से जारी प्रयासों के बाद शिक्षा विभाग ने पहल करते हुए नरगोड़ा शासकीय स्कूल का नाम शहीद वीरेंद्र कैवर्त के नाम पर करने की प्रक्रिया शुरू की है। इसी विद्यालय में वीरेंद्र ने अपनी शिक्षा ग्रहण की थी। प्रेसवार्ता में जयराम सिंह, मुकेश साहू, विजय कौशिक, रवि गोपाल, मोहनलाल जांगड़े, राजकुमार कोसले, बीएस निषाद और दीप कैवर्त सहित कई सदस्य मौजूद रहे।

