तखतपुर; कोपरा जलाशय मछली पालन के लिए लीज पर उपलब्ध, आवेदन 27 जून तक!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) तखतपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले कोपरा जलाशय को मछली पालन हेतु लीज पर देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस संबंध में मछली पालन विभाग ने पंजीकृत मछुआ सहकारी समितियों और स्थानीय मछुआ समूहों से 27 जून 2025 तक आवेदन आमंत्रित किए हैं। इच्छुक समितियां निर्धारित तिथि तक कार्य दिवसों में शाम 5 बजे तक अपने आवेदन पत्र कार्यालय उप संचालक मछली पालन बिलासपुर में जमा कर सकती हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि डाक से प्राप्त या निर्धारित तिथि के पश्चात् प्राप्त आवेदन पत्र मान्य नहीं किए जाएंगे। कोपरा जलाशय का औसत जलक्षेत्र 117.17 हेक्टेयर है और इसका वार्षिक मत्स्य उत्पादन 44.86 मीट्रिक टन आंका गया है। जलाशय से मिलने वाली वार्षिक आय, नीलामी राशि को छोड़कर लगभग 6.23 लाख रुपये है। लीज के लिए प्रारंभिक प्रस्तावित राशि 6.85 लाख रुपये तय की गई है। लीज पर आवेदन करने के लिए मछुआ सहकारी समिति या समूह का जलाशय क्षेत्र में सक्रिय पंजीकरण आवश्यक है। प्राथमिकता के आधार पर पहले जलाशय की कार्यक्षेत्र में स्थित सक्रिय समितियों को अवसर मिलेगा। यदि वहां कोई समिति या समूह उपलब्ध नहीं है, तो 8 किलोमीटर की परिधि में स्थित अन्य समितियों को प्राथमिकता दी जाएगी। यदि इन प्राथमिकताओं के भीतर भी कोई समिति या समूह उपलब्ध नहीं होता है, तब जलाशय के बाहर की परिधि में आने वाली इकाइयों को पात्र माना जाएगा। प्रत्येक समिति को प्रति सदस्य 2 हेक्टेयर के मान से जलाशय लीज पर दिया जा सकेगा। एक समिति केवल एक ही आवेदन प्रस्तुत कर सकती है। आवेदन में समिति के विधिवत पारित प्रस्ताव के साथ लीज राशि की सहमति और अनुबंध की शर्तों का स्पष्ट उल्लेख किया जाना अनिवार्य होगा। स्वीकृत आवेदन के बाद संबंधित समिति को 10 दिनों के भीतर प्रथम किस्त जमा कर अनुबंध निष्पादित करना होगा। यदि एक से अधिक समितियां जलाशय को लीज पर लेना चाहती हैं, तो उन्हें पृथक-पृथक आवेदन देना होगा और सभी से संयुक्त अनुबंध निष्पादित किया जाएगा। ऐसी स्थिति में सभी समितियां शासकीय शर्तों के पालन के लिए समान रूप से उत्तरदायी होंगी। यदि कई समितियां मिलकर एक समिति को अधिकृत कर लीज प्राप्त करना चाहती हैं, तो उन्हें सहकारी नियमों के अंतर्गत पंजीकृत अपेक्स संस्था बनाकर आवेदन करना होगा। अनुबंध निष्पादन में विलंब अथवा निर्धारित प्रक्रिया का पालन न करने की स्थिति में पट्टा निरस्त कर अन्य पात्र समितियों के आवेदन पर विचार किया जाएगा। पट्टा स्वीकृति के पश्चात् प्रथम किस्त की राशि का 25 प्रतिशत बतौर सुरक्षा राशि प्रथम पक्षकार के नाम पर जमा करना होगा, जिसे अंतिम वर्ष की लीज राशि में समायोजित किया जाएगा। यदि पट्टाधारक अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो विभागीय अधिकारी द्वारा तीन बार 15-15 दिन के अंतराल में नोटिस दिए जाने के बाद संचालक, मछली पालन छत्तीसगढ़ की अनुमति से लीज निरस्त की जा सकती है। पट्टाधारक को मछली पालन कार्य विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित करना होगा। विभाग के अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण करेंगे और आवश्यक निर्देश देंगे, जिनका पालन अनिवार्य होगा। लीज अवधि के दौरान प्रतिवर्ष 16 जून से 15 अगस्त तक छत्तीसगढ़ नदी नियम के अंतर्गत जलाशय में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध रहेगा। इसका उल्लंघन अनुबंध शर्तों का उल्लंघन माना जाएगा। साथ ही पट्टाधारक को शासन द्वारा निर्धारित आकार की मछलियों को ही निकालने की अनुमति रहेगी। मछली बीज उत्पादन एवं अनुसंधान कार्यों के लिए विभाग की मांग के अनुसार निर्धारित शासकीय दर पर प्रजनक मछली की आपूर्ति करना भी अनिवार्य होगा। संचालक, मछली पालन, छत्तीसगढ़ द्वारा निर्धारित की गई लीज राशि अंतिम मानी जाएगी और यह सभी आवेदकों के लिए बाध्यकारी होगी।
