VIDEO! मस्तूरी; मृतक के नाम पर निकली पीएम आवास योजना की राशि, कागज़ों में बने मकान धरातल पर निकले झोपड़ी..ग्रामीणों ने की कलेक्टर से शिकायत, कार्रवाई की मांग पर प्रशासन मौन!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) जिसे केंद्र सरकार ने गरीबों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया था, उसकी पारदर्शिता और क्रियान्वयन पर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से आई एक रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनपद पंचायत मस्तूरी के अंतर्गत ग्राम कर्रा में योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सचिव, रोजगार सहायक, जनपद अधिकारी और बैंककर्मियों की मिलीभगत से मृत व्यक्तियों के नाम पर भी आवास की तीनों किश्तें निकाल ली गईं। वहीं जिन लोगों को वास्तव में सहायता मिलनी चाहिए थी, वे आज भी झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं। गांव की बुजुर्ग महिला अंजोरा बाई और श्याम बाई यादव आज भी कच्ची झोपड़ी में रह रही हैं, जबकि रिकॉर्ड में उनके लिए पक्का मकान दर्शाया गया है।
गीता बाई नामक महिला ने बताया कि उन्हें अब तक एक भी किश्त नहीं मिली, लेकिन दस्तावेज़ों में उनके नाम पर तीनों किश्तें जारी की जा चुकी हैं। सबसे चौंकाने वाला मामला ग्रामीण शिवकुमार के पिता का है, जिनकी मृत्यु कई साल पहले हो चुकी थी। इसके बावजूद उनके नाम पर प्रधानमंत्री आवास योजना की पूरी राशि जारी कर दी गई। शिवकुमार ने सवाल उठाया है कि जब उनके पिता अब जीवित नहीं हैं, तो बैंक से पैसा किसने निकाला और किस आधार पर? स्थानीय प्रतिनिधि टीकम कुमार कौशिक और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गांव में ऐसे दस से अधिक मामले हैं, जहां कागज़ों में मकान बन चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में सिर्फ झोपड़ियां हैं। कई लोगों ने यह विश्वास करके अपनी पुरानी झोपड़ियां तक तोड़ दीं कि अब उन्हें पक्का मकान मिलेगा, लेकिन वे अब खुले आसमान के नीचे या प्लास्टिक की छावनी में रहने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने इस संबंध में बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल और जिला सीईओ संदीप अग्रवाल को लिखित शिकायत दी है तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। हालांकि अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने केवल इतना कहा है कि मामले की जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या गरीबों के हक की इस खुली लूट पर अंकुश लगेगा? क्या मृतकों के नाम पर योजनाओं का दुरुपयोग यूं ही जारी रहेगा? और क्या जिला प्रशासन अब भी इस भ्रष्टाचार पर चुप्पी साधे रहेगा? रफ्तार न्यूज़ सीजी की यह विशेष रिपोर्ट इस बात का प्रमाण है कि यदि जमीनी स्तर पर निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई, तो सरकारी योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती रहेंगी। पीड़ितों की मांग है कि दोषियों पर शीघ्र सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में किसी गरीब का हक न मारा जाए।
