सीपत; अस्थाई गौठान में दो दिन के भीतर 31 मवेशियों ने तोड़ा दम, चारा-पानी व्यवस्था पर सवाल…मौत के बाद जेसीबी से दफनाने और शव नाले में फेंकने के आरोप, सरपंच बोले- आरोप निराधार!


बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) मस्तूरी विकासखंड के सीपत तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत झलमला में किसानों की फसलों को मवेशियों से बचाने के लिए बनाया गया अस्थाई गौठान अब मवेशियों की मौत को लेकर विवादों में घिर गया है। ग्रामीणों के मुताबिक गौठान में महज दो दिनों के भीतर करीब 31 मवेशियों की मौत हुई है। शनिवार को 23 और रविवार को करीब 8 मवेशियों की मौत होने का दावा ग्रामीणों ने किया है। हालांकि, सरपंच ने इस संख्या से इनकार करते हुए कुल 14 मवेशियों की मौत होने की बात कही है। ग्रामीणों ने गौठान की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि लगातार बारिश के बीच गौठान परिसर कीचड़ से भर गया था और मवेशियों के लिए पर्याप्त चारा, पानी तथा बारिश से बचने की व्यवस्था नहीं थी। ग्रामीणों का दावा है कि बड़ी संख्या में मवेशियों को सीमित जगह में रखा गया था, जिससे उनकी स्थिति और खराब होती चली गई। ग्रामीणों के अनुसार सरपंच धनलाल साहू द्वारा करीब दो महीने पहले गांव के खुले मैदान में फेंसिंग तार लगाकर अस्थाई गौठान तैयार कराया गया था। आसपास के किसानों के खेतों में घूमने वाले मवेशियों को पकड़कर यहां रखा जा रहा था। ग्रामीणों का आरोप है कि एक समय में गौठान में 300 से अधिक मवेशियों को रखा गया, लेकिन उनकी संख्या के अनुपात में चारा, पानी और बारिश से बचाव की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई।
मनरेगा से पैरा जुटाने के बावजूद चारे को लेकर सवाल……
ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा मजदूरों के माध्यम से किसानों के खेतों से पैरा एकत्र कराया गया था। इसके बावजूद गौठान में बंद मवेशियों को नियमित रूप से चारा उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाया जा रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि बड़ी मात्रा में पैरा मौजूद होने के बावजूद मवेशियों को पर्याप्त भोजन नहीं मिला। लगातार बारिश के कारण पूरा परिसर कीचड़ में तब्दील हो गया, जिससे मवेशियों के लिए खड़े रहना और बैठना भी मुश्किल हो गया।
मौत के बाद शवों को ठिकाने लगाने का भी आरोप……
मवेशियों की मौत के बाद शवों को ठिकाने लगाने को लेकर भी ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ मृत मवेशियों के शवों को जेसीबी से गड्ढा खुदवाकर दफना दिया गया, जबकि कुछ शवों को नाले के पानी में बहाने अथवा अन्य स्थानों पर फेंकने की बात कही जा रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और पूरे मामले की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों में आक्रोश, निष्पक्ष जांच की मांग……
एक साथ बड़ी संख्या में मवेशियों की मौत की खबर सामने आने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, मृत मवेशियों की मौत के कारणों का पता लगाने, आवश्यक चिकित्सकीय जांच/पोस्टमार्टम कराने तथा गौठान में चारा-पानी और अन्य व्यवस्थाओं की जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि व्यवस्थाएं पर्याप्त थीं, तो इतने कम समय में बड़ी संख्या में मवेशियों की मौत कैसे हुई, इसका जवाब जांच के बाद सामने आना चाहिए।
सरपंच बोले- आरोप निराधार, बारिश और बीमारी से हुई मौत…..
वहीं मामले को लेकर सरपंच धनलाल साहू ने ग्रामीणों के आरोपों को निराधार बताया है। सरपंच के मुताबिक शनिवार को 6 और रविवार को 8 मवेशियों की मौत हुई है, यानी कुल 14 मवेशियों की मौत हुई। उन्होंने कहा कि गौठान में चारा और पानी की पर्याप्त व्यवस्था थी तथा बारिश के कारण मवेशियों की मौत हुई है। सरपंच ने यह भी कहा कि मृत मवेशियों को दुर्गंध और बीमारी फैलने के खतरे को देखते हुए दफनाया गया। उनके अनुसार गौठान का संचालन पंचायत द्वारा नहीं, बल्कि किसानों द्वारा किया जा रहा था।
अब जांच पर टिकी नजर……
ग्रामीणों और सरपंच के दावों में मवेशियों की मौत की संख्या को लेकर ही बड़ा अंतर सामने आ रहा है। ऐसे में सबसे अहम सवाल यही है कि आखिर झलमला के अस्थाई गौठान में कितने मवेशियों की मौत हुई और उनकी मौत की वास्तविक वजह क्या थी? चारा-पानी की व्यवस्था कैसी थी, मृत मवेशियों के शवों का निस्तारण किस प्रक्रिया से किया गया और गौठान में मवेशियों की देखरेख की जिम्मेदारी किसकी थी—इन सभी सवालों का जवाब प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

