VIDEO! बिलासपुR; “नो एंट्री” में घुस रहे हाइवा-ट्रैक्टर..ट्रैफिक अफसर मोबाइल में मशगूल, दोपहिया चालकों पर बरस रही सख्ती..भारी वाहनों की बेरोकटोक एंट्री से सड़कें बनीं खतरनाक, नियमों की उड़ रही धज्जियां!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) शहर की सड़कों पर इन दिनों एक अजीब नजारा देखने को मिल रहा है, एक ओर ट्रैफिक पुलिस दोपहिया वाहनों को रोक-रोक कर चालान काट रही है, तो दूसरी ओर “नो एंट्री” का बोर्ड दिखाते हुए हाइवा, ट्रैक्टर, माजदा और डस्ट लदे कैप्सूल वाहन बेखौफ रफ्तार से दौड़ रहे हैं। छठ घाट से लेकर गुरुनानक चौक तक का इलाका हो या तोरवा पुल के पास का ट्रैफिक पॉइंट, सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चेकिंग जरूर होती है, लेकिन चेकिंग किस पर होती है..यह सवाल शहरवासियों की जुबान पर है।
दोपहिया वाहन चालकों से सख्ती, लेकिन भारी वाहनों को खुली छूट..निरीक्षक मोबाइल में मशगूल, रेत वाहन आराम से पास…..
चेकिंग का जिम्मा जिनके कंधों पर हैं, वहीं निरीक्षक मोबाइल में व्यस्त नजर आते हैं। सामने से रेत, राखड़ और डस्ट से लदे वाहन गुजरते हैं, लेकिन ट्रैफिक विभाग की नजरें बंद रहती हैं। जिले के उच्च अधिकारी दावा करते हैं कि भारी वाहनों के प्रवेश पर सख्त रोक है और केवल जरूरी वस्तुओं के वाहन ही तय समय में प्रवेश कर सकते हैं। लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि इन वाहनों की गति और संख्या देखकर कोई नहीं कह सकता कि ये आपूर्ति से जुड़े वाहन हैं। भीड़भाड़ वाले इलाकों में सुबह-सुबह दौड़ते ये वाहन कई बार हादसों को न्योता देते हैं। आम जनता का सवाल जायज़ है..जब ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी में नियम टूट रहे हैं, तो फिर क्या यह लापरवाही है या मिलीभगत?
सवालों की बौछार… जवाब कौन देगा…?
• नो एंट्री में भारी वाहन क्यों घुसते हैं?
• क्या यातायात नियम सिर्फ दोपहिया चालकों के लिए हैं?
• यदि हादसा होता है, तो जिम्मेदार कौन होगा?
• ट्रैफिक पुलिस सिर्फ चालान वसूली तक सीमित है? अगर समय रहते सख्ती नहीं बरती गई, तो शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। ट्रैफिक विभाग को जवाबदेह बनाना होगा और उन अफसरों पर भी सवाल उठेंगे जो ड्यूटी के दौरान मोबाइल में खोए रहते हैं।


















