राजस्व विभाग की लापरवाही से टूट गया किसान; कागजात में त्रुटि से तंग आकर खाया जहर…मुख्यमंत्री की चेतावनी के बावजूद सिस्टम बेअसर, रजिस्ट्री दफ्तर में किसान ने की आत्महत्या की कोशिश!

छत्तीसगढ़: (प्रांशु क्षत्रिय) राजस्व विभाग की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है और इस बार इसका शिकार बना एक पीड़ित किसान हैं। बालोद जिले के गुंडरदेही तहसील के रजिस्ट्री कार्यालय में मंगलवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब जमीन के कागजात में गलती सुधारवाने की गुहार लगाते-लगाते थक चुका किसान रामकुमार उम्र लगभग 50 वर्ष निवासी ग्राम भुसरेंगा (बेलौदी) जहर लेकर कार्यालय पहुंचा और आत्महत्या का प्रयास किया। बताया गया कि किसान रामकुमार अपनी पत्नी की जमीन के दस्तावेज में हुई त्रुटि को सुधरवाने के लिए कई दिनों से रजिस्ट्री कार्यालय के चक्कर काट रहा था। उसने कई बार कर्मचारियों से निवेदन किया, लेकिन हर बार उसे टाल दिया गया। जब गुरुवार को फिर से उसे निराशा हाथ लगी, तो उसने आहत होकर जेब से जहर निकाला और सेवन करने की कोशिश की। जहर पीने के प्रयास में रसायन उसकी आंख में चला गया, जिससे वह अचानक बेहोश हो गया और उसकी तबीयत बिगड़ गई। तुरंत कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई। कर्मचारियों ने उसे तत्काल गुंडरदेही अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज जारी है। घटना की सूचना मिलते ही गुंडरदेही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने प्रशासनिक उदासीनता और राजस्व विभाग की संवेदनहीनता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
मुख्यमंत्री की सख्त चेतावनी के बावजूद हालात जस के तस…..
गौरतलब है कि दो दिन पहले ही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रायगढ़ में “सुशासन तिहार” के अंतर्गत आयोजित समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि राजस्व अभिलेखों में त्रुटि के लिए संबंधित अधिकारी और कर्मचारी सीधे जिम्मेदार माने जाएंगे। उन्होंने कहा था कि यदि किसी अधिकारी के लॉगिन से गलती होती है तो उस पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन बालोद की यह घटना दिखाती है कि मुख्यमंत्री की चेतावनियों का प्रशासन पर कितना असर हुआ है। यह घटना न सिर्फ एक व्यक्ति की पीड़ा को दर्शाती है, बल्कि पूरे सिस्टम की सुस्ती और असंवेदनशीलता को उजागर करती है। सवाल यह है कि जब एक साधारण सुधार के लिए किसान को जहर खाने पर मजबूर होना पड़े, तो उस व्यवस्था की जवाबदेही तय करना कब शुरू होगा?
