सीपत; बिजली विभाग की मनमानी से तड़प रही जनता– न बिजली, न पानी, अधिकारी काट रहे फोन!..तीन दिन से अंधेरे में डूबा यह गांव..ग्रामीणों ने की मांग लापरवाह अफसरों पर हो कड़ी कार्रवाई!

सीपत: (प्रांशु क्षत्रिय) सीपत क्षेत्र में बिजली विभाग की लचर कार्यप्रणाली ने एक बार फिर आमजन को भारी संकट में डाल दिया है। ग्राम जांजी के बंगला भाटापारा मोहल्ले में बीते तीन दिनों से बिजली सप्लाई पूरी तरह ठप है। ट्रांसफार्मर में आई तकनीकी खराबी के कारण दो फेज की आपूर्ति बंद है, जिससे लोगों का जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती ने लोगों की परेशानी दोगुनी कर दी है। न पंखे चल रहे, न कूलर, और पानी की सप्लाई भी ठप्प पड़ी है। लोग पीने के पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। मोहल्लेवासियों ने कई बार बिजली विभाग को शिकायतें दीं, लेकिन कोई असर नहीं पड़ा। अधिकारी आज भी मूकदर्शक बने बैठे हैं। स्थानीय संवाददाता ने जब एई प्रमोद चौबे से मरम्मत कार्य पर जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने बेहद गैरजिम्मेदाराना बयान देते हुए कहा अभी तो तीन दिन ही हुए हैं, दिन गिनते रहो… एक्सीडेंटल होता है बिजली का काम पत्रकार महोदय! इतना कहकर उन्होंने फोन काट दिया। वहीं जेई रंजना देवांगन ने चार बार कॉल करने के बावजूद एक बार भी फोन रिसीव नहीं किया। मोहल्लेवासियों का कहना है कि कर्मचारी मौके पर आकर खराबी की पुष्टि कर चुके हैं, लेकिन मरम्मत की प्रक्रिया शुरू ही नहीं हुई। वार्ड 20 के पंच गौतम ठाकुर ने बताया कि तीन दिन से बिजली नहीं है, बच्चे-बुजुर्ग तड़प रहे हैं, और जवाब में सिर्फ ‘देखते हैं’ कहा जाता है।
लचर व्यवस्था से पूरे क्षेत्र में हाहाकार….
यह संकट केवल जांजी गांव तक सीमित नहीं है। पूरे क्षेत्र में गर्मी के दिनों में बिजली कटौती आम बात हो गई है। इसके पहले भी सीपत के पूर्व एई राजकुमार चौहान को शोकाज नोटिस और जेई अनुराग सोनी को निलंबन झेलना पड़ा था। बावजूद इसके, नई जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी भी उसी लापरवाही की राह पर चल रहे हैं।
लोगो की मांग- तत्काल ट्रांसफार्मर बदला जाए, दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई……..
मोहल्लेवासियों ने मांग की है कि संबंधित अधिकारी तत्काल मौके पर मुआयना करें, नया ट्रांसफार्मर लगवाएं या खराबी तत्काल दूर करें। साथ ही इस घोर लापरवाही के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की मनमानी पर रोक लग सके। सवाल यह है कि क्या बिजली विभाग जागेगा या जनता यूं ही तड़पती रहेगी?
