प्लास्टिक ड्रम से बना देसी कूलर बना गर्मी का तोड़– बिलासपुर के शिवचरण की जुगाड़ टेक्नोलॉजी ने मचाया धमाल!..कोरोना काल में आई सूझबूझ, बिक चुके हैं 200 से ज्यादा यूनिट, खबर पढ़कर जानिए पूरा मामला…….


बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) ना एसी चाहिए, ना महंगा कूलर– बस एक प्लास्टिक ड्रम और देसी दिमाग! बिलासपुर जिले के छोटे से गांव बसिया में रहने वाले शिवचरण सूर्यवंशी ने ऐसा देसी कूलर बना डाला, जो अब गांव से निकलकर शहरों में भी पहचान बना रहा है। ये कहानी शुरू हुई कोरोना लॉकडाउन के दौरान, जब शिवचरण ने अपने घर के लिए एक किफायती और सुरक्षित कूलर बनाने की ठानी। वजह थी– उनके बच्चे को टीन के कूलर से करंट लगना। उन्होंने ठान लिया कि ऐसा कूलर बनाएंगे जो ठंडा भी हो और पूरी तरह सुरक्षित भी। शिवचरण ने प्लास्टिक ड्रम, एक मोटर, थोड़ी वायरिंग और खस की परत का इस्तेमाल कर एक ऐसा देसी कूलर तैयार किया, जिसमें 55 लीटर पानी भरने की क्षमता है और घंटों तक ठंडी हवा देता है। करंट लगने का खतरा नहीं, बिजली की खपत भी कम।
गांव से शुरू, अब बना बिजनेस– बिक चुके हैं 200 से ज्यादा यूनिट…..
जब गांववालों ने इस देसी कूलर की ठंडक महसूस की, तो मांग इतनी बढ़ गई कि अब तक शिवचरण 200 से ज्यादा कूलर बेच चुके हैं। कीमत महज 3 से 7 हजार रुपये– सस्ता, टिकाऊ और भरोसेमंद।
शिवचरण ने न सिर्फ खुद को बनाया आत्मनिर्भर, बल्कि गांव के युवाओं को भी दिया रोजगार……
अब ये देसी कूलर सिर्फ एक जुगाड़ नहीं, बल्कि एक मिनी इंडस्ट्री बन चुका है। शिवचरण गांव के युवाओं को भी कूलर बनाना सिखा रहे हैं और उन्हें साथ जोड़कर रोजगार दे रहे हैं।


