गरियाबंद में आम के पेड़ की धूमधाम से शादी! काठ के दूल्हे संग हुए सात फेरे, मिला पर्यावरण संरक्षण का संदेश…भोज भी हुआ, जुटे ग्रामीण, खबर पढ़कर जानिए पूरा मामला…….

गरियाबंद: (प्रांशु क्षत्रिय) जिले के ग्राम पंचायत तेतलखुटी (धरनीबहाल) में एक अनोखी और पर्यावरण प्रेम से ओत-प्रोत परंपरा को जीवंत किया गया। यहां के जयसिंह ठाकुर ने अपने बगीचे के आम के पेड़ की शादी काठ से बने दूल्हे के साथ पूरे वैदिक विधि-विधान से कराई। यह परंपरा तब निभाई जाती है, जब किसी आम के पेड़ में पहली बार फल आते हैं। इस विशेष अवसर पर आम के पेड़ को दुल्हन और लकड़ी से बने पुतले को दूल्हा बनाया गया। गांव की महिलाओं ने मंगल गीतों के साथ हल्दी, चावल, सिंदूर और अन्य रस्में निभाईं। पंडित धोबलेश्वर पुरोहित के मंत्रोच्चार के बीच शादी की रस्में—सिंदूरदान, कन्यादान और सात फेरे पूरे विधि-विधान से सम्पन्न कराए गए। पेड़ के मालिक जयसिंह ठाकुर व उनकी पत्नी ने पेड़ का कन्यादान करते हुए कहा, “जब तक आम के पेड़ की शादी नहीं हो जाती, तब तक इसके पहले फल को कोई नहीं खाता। यह परंपरा हमें पेड़ों के साथ भावनात्मक रिश्ता जोड़ना सिखाती है।” शादी के बाद दोनों पक्षों के लिए भव्य भोज का आयोजन भी किया गया, जिसमें ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पंडित धोबलेश्वर ने बताया कि यह परंपरा प्रकृति से आत्मीय संबंध और संरक्षण की भावना को मजबूत करती है। आने वाली पीढ़ियों को यह सीख देती है कि वृक्ष भी जीवन का अहम हिस्सा हैं, उनकी रक्षा और सम्मान करना हमारी जिम्मेदारी है। यह अनोखी शादी न सिर्फ एक धार्मिक परंपरा है, बल्कि प्रकृति के प्रति आस्था, सम्मान और जागरूकता का प्रतीक है। तेतलखुटी गांव की यह परंपरा आज भी लोगों को यह याद दिलाती है कि धरती तभी बचेगी, जब हम पेड़-पौधों से प्रेम करेंगे।

