बिलासपुर; अपोलो पर फर्जी डॉक्टर का साया! कांग्रेस का धमाका, मांगी मेडिकल फाइल, दी सात दिन की चेतावनी.. खबर पढ़कर जानिए पूरा मामला……

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) फर्जी डॉक्टर की नियुक्ति का मामला अब अपोलो अस्पताल के दरवाजे तक पहुंच गया है। दमोह जिला अस्पताल में कार्यरत कार्डियोलॉजिस्ट नरेंद्र विक्रमादित्य यादव के खिलाफ लगे फर्जीवाड़े के आरोपों ने अब बिलासपुर के अपोलो अस्पताल को भी घेरे में ले लिया है। मंगलवार को कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने अपोलो अस्पताल पहुंचकर अस्पताल प्रबंधन से सीधा सवाल-जवाब किया। मामला बेहद गंभीर है, क्योंकि फर्जी डॉक्टर नरेंद्र यादव पहले अपोलो अस्पताल में भी अपनी सेवाएं दे चुका है। आरोप है कि उसने यहां रहते हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ला की सर्जरी की थी। सर्जरी के 15 से 20 दिन बाद ही उनकी मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद अब सवाल उठने लगे हैं—क्या यह एक लापरवाही नहीं बल्कि एक बड़ा फर्जीवाड़ा था? कांग्रेस नेताओं ने अपोलो प्रबंधन से शुक्ला जी की मेडिकल फाइल और इलाज का पूरा रिकॉर्ड मांगा है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि फर्जी डॉक्टर ने अब तक कितने मरीजों का इलाज और ऑपरेशन किया है। कांग्रेस ने अस्पताल प्रशासन को चेतावनी देते हुए साफ कहा है कि यदि सात दिन के भीतर पूरी जानकारी नहीं दी गई, तो सड़क से सदन तक आंदोलन होगा। इस दौरान मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया, पूर्व विधायक रश्मि आशीष सिंह, सियाराम कौशिक और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय केसरवानी ने प्रेस वार्ता कर पूरे मामले को जनता के सामने रखा।
एफआईआर की मांग……
प्रतिनिधिमंडल ने सरकंडा थाने में अपोलो अस्पताल के अध्यक्ष, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, रीजनल हेड और सीईओ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की भी मांग की है। अपोलो अस्पताल के प्रवक्ता दिवेश गोपाल ने कहा कि यह मामला वर्षों पुराना है, लेकिन कांग्रेस द्वारा मांगी गई सभी जानकारियाँ उन्हें उपलब्ध कराई जाएंगी। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि जांच कराई जा रही है और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि अपोलो को पहले ही नोटिस भेजा जा चुका है, और जवाब का इंतजार है। जैसे-जैसे यह मामला आगे बढ़ रहा है, यह सिर्फ स्वास्थ्य लापरवाही नहीं बल्कि राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। अपोलो जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की साख पर सवाल उठ रहे हैं। यदि समय रहते प्रबंधन ने पारदर्शिता नहीं दिखाई, तो आने वाले दिनों में मामला और तूल पकड़ सकता है।

