रतनपुर; महामाया मंदिर ट्रस्ट को बदनाम करने की साजिश, निष्पक्ष जांच की मांग..कछुओं की मौत षड्यंत्र का हिस्सा! कैसे शामिल हो सकता है मंदिर ट्रस्ट?- ट्रस्टियों का सवाल, खबर पढ़कर जानिए पूरा मामला………

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) रतनपुर स्थित महामाया मंदिर परिसर में दो दर्जन कछुओं की मौत के मामले में अब नया मोड़ आ गया है। मंदिर ट्रस्ट ने इसे षड्यंत्र करार देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। महामाया मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष आशीष सिंह ठाकुर, उपाध्यक्ष सतीश शर्मा, मुख्य पुजारी एवं मैनेजिंग ट्रस्टी पंडित अरुण शर्मा, कोषाध्यक्ष रितेश जुनेजा, ट्रस्टी विनोद गोरख, शैलेंद्र जायसवाल और सहयोगी ए.पी. त्रिपाठी ने शुक्रवार को बिलासपुर प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा कर अपनी बात रखी। ट्रस्टियों ने स्पष्ट किया कि मंदिर प्रबंधन हर तरह से जांच में सहयोग कर रहा है और इस मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है। फॉरेस्ट विभाग के अधिकारी जांच के लिए मंदिर पहुंचे और सीसीटीवी फुटेज व डीवीआर लेकर गए हैं। ट्रस्ट ने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर मंदिर प्रबंधन को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रस्ट के अनुसार 23 मार्च को कुंड की सफाई कराई गई थी, जिसमें मछलियां निकाली गईं और बाजार में बेचकर उनकी रकम ट्रस्ट में जमा कर दी गई। उस दिन कुंड में कोई कछुआ नहीं दिखा, लेकिन 25 मार्च की सुबह अचानक मृत कछुए कुंड के बाहर नजर आए। ट्रस्ट ने इस घटना को साजिश बताया और कहा कि जांच में ही सच सामने आएगा।
“कैसे शामिल हो सकता है मंदिर ट्रस्ट?” – ट्रस्टियों का सवाल……..
अध्यक्ष आशीष सिंह ठाकुर ने कहा कि मंदिर प्रबंधन इस घटना में कैसे शामिल हो सकता है? उन्होंने बताया कि सीसीटीवी फुटेज में मछली मारते दिख रहे व्यक्ति को वे नहीं पहचानते। उन्होंने संदेह जताया कि कुंड में कछुए कहां से आए, यह भी स्पष्ट नहीं है।
बदनाम करने की साजिश, निष्पक्ष जांच हो………
मुख्य पुजारी एवं मैनेजिंग ट्रस्टी पंडित अरुण शर्मा ने कहा कि जांच को सही दिशा में आगे बढ़ाया जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो। ट्रस्ट ने आरोप लगाया कि आर्थिक और प्रशासनिक मोर्चे पर मंदिर को बदनाम करने का कोई आधार नहीं मिला, इसलिए अब इस तरह की साजिशें रची जा रही हैं। ट्रस्ट ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, ताकि सच्चाई सामने आए और मंदिर प्रबंधन पर लगाए जा रहे झूठे आरोपों का पर्दाफाश हो सके। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।

