राज्यपाल के काफिले की टक्कर से महिला की मौत, संवेदनहीनता पर उठे सवाल..घायल महिला को तड़पता छोड़ गई गाड़ी, राज्यपाल ने नहीं जताया शोक, पुलिस दबाने में जुटी..कानूनी प्रक्रिया पर सवाल, क्या गरीब की जान की कोई कीमत नहीं? खबर पढ़कर समझिए पूरा मामला…….

छत्तिसगढ़: (प्रांशु क्षत्रिय) छत्तीसगढ़ के सरगुजा में राज्यपाल रमेन डेका के काफिले की गाड़ी से टक्कर के बाद गरीब महिला की मौत का मामला गरमा गया है। लेकिन घटना के बाद प्रशासन और राज्यपाल की संवेदनहीनता चर्चा का विषय बन गई। शुक्रवार को मैनपाट के पास राज्यपाल के काफिले की सफेद इनोवा ने सूनी मझवार नामक महिला को टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक टक्कर के बाद वाहन चालक रुका तक नहीं और काफिले में शामिल होकर चलता बना। इसके बाद पुलिस की तीन और गाड़ियां वहां से गुजरीं, लेकिन किसी ने भी घायल महिला की सुध नहीं ली। स्थानीय लोगों ने कमलेश्वरपुर थाने को फोन कर सूचना दी, तब जाकर महिला को अस्पताल ले जाया गया। हालत बिगड़ने पर उसे अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। सवाल उठ रहा है कि अगर समय पर महिला को अस्पताल पहुंचाया जाता तो क्या उसकी जान बच सकती थी? हैरानी की बात यह है कि राज्यपाल रमेन डेका ने मृतिका के परिजनों से न तो मुलाकात की, न ही कोई संवेदना व्यक्त की। पुलिस ने भी अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की, बल्कि सिर्फ मर्ग कायम करने की बात कह रही है। परिजनों ने 10 लाख मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग की, लेकिन प्रशासन ने सिर्फ 25 हजार की तत्काल सहायता दी और 2 लाख मुआवजा देने का आश्वासन देकर पल्ला झाड़ लिया। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के एडवोकेट संतोष पांडेय के मुताबिक पुलिस को इस मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए और अगर चालक दोषी पाया जाता है तो मोटर वाहन अधिनियम के तहत मामला दर्ज होना चाहिए। हालांकि काफिले की गाड़ी होने के कारण मामला विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत दबाया जा सकता है।
कानूनी प्रक्रिया पर सवाल, क्या गरीब की जान की कोई कीमत नहीं..?
इस घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अगर टक्कर किसी बड़े अधिकारी या नेता को लगी होती, तो क्या पुलिस की यही लापरवाही होती? क्या गरीब की जान की कोई कीमत नहीं? जनता जवाब चाहती है।
