बिना सूचना बोर्ड के बन रहा नेशनल हाईवे! नियमों की अनदेखी, जनता की सुरक्षा दांव पर..ठेकेदार की मनमानी जारी, पारदर्शिता नदारद..संकेतक बोर्ड न होने से बढ़ रहा हादसों का खतरा, प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग, खबर पढ़कर जानिए पूरा मामला……….

रतनपुर:(प्रांशु क्षत्रिय) कल्पना कीजिए, आप एक सुनसान रतनपुरहाईवे पर सफर कर रहे हैं, अचानक सामने गड्ढा आ जाता है, या कोई निर्माणाधीन पुल… लेकिन कोई संकेतक बोर्ड नहीं! ऐसे में हादसा टल सकता है क्या? यही हाल इन दिनों रतनपुर-पेंड्रा नेशनल हाईवे का है, जहां बिना किसी सूचना बोर्ड और संकेतक के निर्माण कार्य जारी है। नेशनल हाईवे का निर्माण शुरू करने से पहले संबंधित विभाग द्वारा सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य होता है, जिसमें सड़क की लंबाई, लागत, अनुबंधकर्ता, कार्य की समय-सीमा और जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी स्पष्ट होनी चाहिए। लेकिन इस महत्वपूर्ण प्रावधान को नजरअंदाज कर दिया गया है। इसका नतीजा यह हो रहा है कि लोग यह तक नहीं जानते कि यह सड़क कितने दिनों में पूरी होगी और इसकी जिम्मेदारी किसकी है। बिना सूचना बोर्ड के इस निर्माण कार्य में ठेकेदार को पूरी छूट मिल गई है। गुणवत्ता कैसी है? सड़क कितनी मजबूत बनेगी? कोई सवाल उठाने वाला ही नहीं है, क्योंकि जानकारी उपलब्ध ही नहीं कराई गई। पारदर्शिता के अभाव में ठेकेदार अपनी मर्जी से काम कर रहे हैं और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। निर्माणाधीन सड़क पर जगह-जगह गड्ढे खुदे हैं, लेकिन कोई चेतावनी बोर्ड नहीं। ऐसे में राहगीर और वाहन चालक कब दुर्घटना का शिकार हो जाएं, कहना मुश्किल है। संकेतक बोर्ड न होने से वाहन चालक सड़क की स्थिति से अनजान रहते हैं और हादसों का शिकार हो जाते हैं। यह लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है! जब इस मुद्दे पर नेशनल हाईवे विभाग के इंजीनियर शर्मा से बात की गई, तो उन्होंने अजीब दलील दी—जहां से सड़क निर्माण शुरू हुआ है, वहां सूचना बोर्ड लगाने के लिए जगह नहीं है! हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ठेकेदार को निर्देश दिए गए हैं कि किसी उपयुक्त स्थान पर सूचना बोर्ड लगाया जाए। लेकिन सवाल यह उठता है कि अब तक यह निर्देश अमल में क्यों नहीं लाए गए? स्थानीय लोगों में इस लापरवाही को लेकर जबरदस्त नाराजगी है। उनका कहना है कि यह सड़क किस विभाग के तहत बन रही है, इसकी लागत कितनी है और कहां तक इसका विस्तार होगा, इसकी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। अब समय आ गया है कि प्रशासन इस गंभीर लापरवाही पर ध्यान दे और तुरंत प्रभाव से सूचना बोर्ड व संकेतक बोर्डों की व्यवस्था करे, ताकि दुर्घटनाओं को रोका जा सके। वरना यह नेशनल हाईवे, “डेथ हाईवे” में बदल सकता है!

