बिलासपुर स्मार्ट सिटी की सड़कों पर मवेशियों का राज! हाईकोर्ट की फटकार के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था..करोड़ों खर्च, फिर भी सड़क पर मवेशियों का कब्जा, हादसों का शहर बनता बिलासपुर..आखिर कब निकलेगी व्यवस्था ‘चोचलों’ से बाहर?

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) स्मार्ट सिटी बनने का दावा करने वाला बिलासपुर इन दिनों सड़कों पर बेखौफ दौड़ते मवेशियों का अड्डा बन चुका है। मवेशी मुक्त क्षेत्र का बोर्ड टंगा जरूर है, लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट नजर आ रही है। शहर के मुख्य मार्गों पर गाय, बैल और सांडों का आतंक बढ़ता जा रहा है। राहगीर हादसों का शिकार हो रहे हैं, वाहन चालकों को जान बचाने के लिए स्पीड बढ़ाकर भागना पड़ रहा है और प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
सदर बाजार, ईदगाह चौक, पुलिस लाइन, सत्यम चौक और मगरपारा रोड जैसे शहर के प्रमुख इलाकों में मवेशी आराम से घूम रहे हैं, सड़क पर दौड़ लगा रहे हैं और बीच सड़क दंगल भी कर रहे हैं। यह समस्या सिर्फ कुछ इलाकों की नहीं बल्कि पूरे शहर में फैली हुई है। हैरानी की बात यह है कि हाईकोर्ट की फटकार के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। कभी-कभी प्रशासन हाईकोर्ट रोड पर दिखावे के लिए मवेशियों की पकड़-धकड़ करता है, लेकिन बाकी शहर में कोई सुधार नहीं हुआ।
नगर निगम ने शहर को मवेशी मुक्त करने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर दिए, लेकिन नतीजा सिफर है। गोकुल धाम बन गया, गौठान बनाए गए, सरकारी और निजी गौशालाएं शुरू की गईं, कोटा-जोगीपुर में नया गौ-अभ्यारण्य भी बना– फिर भी सड़कों पर मवेशी दौड़ रहे हैं। शासन की एकड़ो जमीन चलिंगी पर दे दी गई, लेकिन शहर से मवेशी हटाने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं हो सकी।
हादसों का शहर बनता बिलासपुर…….
इन मवेशियों की वजह से अब तक कई हादसे हो चुके हैं। सड़क पर अचानक दौड़ते मवेशियों से टकराने के कारण वाहन चालकों को गंभीर चोटें आई हैं, कई लोगों की जान भी जा चुकी है। अब सवाल यह उठता है कि जब स्मार्ट सिटी की सड़कें सुरक्षित नहीं हैं, तो आखिर स्मार्टनेस किस चीज की? प्रशासन केवल दिखावे की कार्रवाई कर रहा है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। बिलासपुर को न्यायधानी और स्मार्ट सिटी कहकर गौरवान्वित किया जाता है, लेकिन जब सड़क पर मवेशियों का राज हो और लोग अपनी जान बचाने के लिए भागने को मजबूर हों, तो स्मार्टनेस सिर्फ कागजों पर ही दिखती है। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन कब चोचलों से बाहर निकलकर ठोस कार्रवाई करता है, या फिर हाईकोर्ट को एक बार फिर सख्त आदेश जारी करने पड़ेंगे!
