बिलासपुर में रेस्क्यू किए खच्चरों की सुपुर्दगी पर सवाल; गौठान से महापौर पति के ईंट-भट्ठे पहुंचाने का आरोप..पशु सेवकों ने पूछा..बिना सूचना और किसके आदेश पर हटाए गए बेजुबान? वापसी से लेकर कार्रवाई तक की उठी मांग!


बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) पशुओं के साथ क्रूरता रोकने और बेजुबानों की सेवा करने वाले पशु सेवकों ने अब खच्चरों की कथित सुपुर्दगी को लेकर सवाल उठाए हैं। पशु सेवक निधि तिवारी और सपना क्षत्री ने आरोप लगाया है कि उनके द्वारा रेस्क्यू कर मोपका गौठान में रखे गए सात खच्चरों को 8 अक्टूबर की सुबह बिना उनकी जानकारी के महापौर पूजा विधानी के पति अशोक विधानी के ईंट-भट्ठे पहुंचा दिया गया। पशु सेवकों ने इस मामले में खच्चरों को वापस दिलाने और संबंधित लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है। आवेदन के मुताबिक, 20 अगस्त 2026 को पशु सेवकों को तिफरा, बिलासपुर में खच्चरों के साथ कथित क्रूरता किए जाने का वीडियो मिला था। वीडियो मिलने के बाद वे संबंधित स्थान पर पहुंचे। पशु सेवकों का दावा है कि वहां के लोगों ने उन्हें बताया कि पिछले तीन से चार महीनों से कुछ बच्चे खच्चरों को मारते थे, उन्हें भूखा-प्यासा रखते थे और एक कमरे में बंद कर देते थे। पशु सेवकों के अनुसार, संबंधित मामले में सिरगिट्टी थाना की पेट्रोलिंग टीम की मौजूदगी में नगर निगम की गाड़ी से छह खच्चरों को रेस्क्यू किया गया था। इसके अलावा एक खच्चर को जरहाभाठा से बचाया गया। इस तरह कुल सात खच्चरों को मोपका गौठान में शिफ्ट कर उनके खान-पान की व्यवस्था की गई। पशु सेवकों का कहना है कि वे पिछले करीब डेढ़ महीने से खच्चरों की देखभाल कर रहे थे।
बिना जानकारी खच्चरों को ले जाने पर उठाए सवाल……
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि 8 अक्टूबर की सुबह महापौर पूजा विधानी के पति अशोक विधानी और जोन क्रमांक 7 के कमिश्नर द्वारा खच्चरों को बिना पूर्व सूचना के वहां से हटाकर अशोक विधानी के ईंट-भट्ठे पहुंचा दिया गया। पशु सेवकों ने यह भी सवाल उठाया है कि खच्चरों को किस आधार पर और किसकी अनुमति से वहां भेजा गया। उनका दावा है कि इनमें से कुछ खच्चर पहले से कमजोर थे। पशु सेवक निधि तिवारी और सपना क्षत्री ने थाना प्रभारी, मोपका चौकी के समक्ष आवेदन देकर रेस्क्यू किए गए खच्चरों को वापस दिलाने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध उचित वैधानिक कार्रवाई करने का भी अनुरोध किया है। अब इस मामले में यह स्पष्ट होना बाकी है कि खच्चरों को गौठान से हटाने का निर्णय किस आधार पर लिया गया और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है। मामले में संबंधित अधिकारियों एवं आरोप लगाए गए पक्ष का जवाब सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

