मातृ-शिशु अस्पताल के प्रसूति वार्ड में अवैध वसूली; स्टाफ नर्स बोली..धन्यवाद से काम नहीं चलेगा, दवा-पानी के लिए 1000 और स्टाफ के लिए 500-500 दो..वीडियो वायरल होते ही मचा हड़कंप, दो नर्स निलंबित!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) शहर के जिला अस्पताल बिलासपुर के अंतर्गत संचालित मातृ-शिशु अस्पताल एक बार फिर विवादों में है। प्रसूति वार्ड से जुड़े दो वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वीडियो में डिलीवरी के बाद प्रसूता के परिजनों से “दवा-पानी” और “खुशी” के नाम पर खुलेआम पैसों की मांग करते हुए स्टाफ नर्स दिखाई और सुनाई दे रही है। मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दो स्टाफ नर्स लक्ष्मी वर्मा और संजू चौरसिया को निलंबित कर दिया है।
“धन्यवाद से काम नहीं चलेगा…”
वायरल वीडियो में एक स्टाफ नर्स प्रसूता के परिजन को बुलाकर कहती है..सब अच्छे से हो गया। इस पर युवक धन्यवाद देता है, तो नर्स जवाब देती है..“धन्यवाद से काम नहीं चलेगा, दवा-पानी और खुशी के नाम पर प्रेम से दे दो… बेटा हुआ है।” इसके बाद नर्स कहती है..“एक मैं लूंगी और 500 वो लोग लेंगी।” परिजन खुद को गरीब बताते हुए 500 रुपये देने की बात करता है, लेकिन नर्स 500 रुपये लेने से इनकार करते हुए कहती है..“मैं इनके बराबर हूं क्या?” वीडियो में युवक यह भी कहता सुनाई देता है..“यह अच्छा नहीं लगता मैडम।” जवाब में नर्स कहती है..“एक ग्लव्स तक नहीं मिलता सरकारी अस्पताल में..आप रहने दीजिए, मत दीजिए, हाथ जोड़ रही हूं।” आखिरकार युवक 1000 रुपये देने की बात कहता हैं..500 मैडम के और 500 अन्य स्टाफ के लिए। इस दौरान अन्य कर्मचारियों द्वारा भी अतिरिक्त रकम के लिए दबाव बनाए जाने की आवाजें सुनाई देती हैं।
एडमिशन फॉर्म के नाम पर भी वसूली…..
इसी आईडी से एक और वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एडमिशन फॉर्म भरवाने के नाम पर 100 रुपये मांगे जाने का आरोप है। हालांकि बाद में दोनों वीडियो पोस्ट करने वाले यूजर ने उन्हें डिलीट कर दिया। विभागीय कार्रवाई में फॉर्म के नाम पर पैसे मांगने की शिकायत का भी उल्लेख किया गया है।
विभाग की कार्रवाई: दो नर्स निलंबित…..
मामले की जानकारी मिलते ही संभागीय संयुक्त संचालक डॉ. अनिल गुप्ता ने जांच के बाद दोनों स्टाफ नर्सों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। स्वास्थ्य महकमे में इस कार्रवाई के बाद हड़कंप मच गया है।
बाहर बोर्ड पर चेतावनी, अंदर वसूली…!
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस प्रसूति कक्ष से वीडियो जुड़ा बताया जा रहा है, उसके बाहर स्पष्ट रूप से सूचना पटल लगा है, जिसमें लिखा है..यदि कोई कर्मचारी पैसे मांगता है तो आरएमओ या सिविल सर्जन से शिकायत करें। अनाधिकृत रूप से पैसा लेना-देना दंडनीय अपराध है। भुगतान करने पर रसीद अवश्य लें। ऐसे में सवाल उठता है कि जब अस्पताल प्रशासन ने स्वयं चेतावनी बोर्ड लगाया है, तो फिर खुलेआम वसूली कैसे हो रही है?
पहले भी लग चुके हैं आरोप….
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी जिला अस्पताल और मातृ-शिशु अस्पताल में डिलीवरी के नाम पर ‘न्योछावर’ मांगने, दुर्व्यवहार और अवैध वसूली के आरोप सामने आ चुके हैं। कई बार शिकायतें भी दर्ज हुईं, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है। सूत्रों के अनुसार जिले के अन्य शासकीय अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में भी डिलीवरी के बाद पैसे मांगना आम बात बन चुकी है। कई मामलों में पैसे न देने पर दुर्व्यवहार की शिकायतें भी सामने आई हैं।
गरीबों की ‘खुशी’ बन रही मजबूरी….
सरकारी अस्पतालों में अधिकतर गरीब और निम्न आय वर्ग के लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में डिलीवरी जैसी संवेदनशील परिस्थिति में “खुशी” और “प्रेम” के नाम पर आर्थिक दबाव बनाना न केवल अनैतिक है, बल्कि कानूनन अपराध भी है। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कमेंट्स के जरिए अपनी आपबीती साझा की। कुछ ने लिखा कि उनसे सफाई, डिलीवरी और सेवा के नाम पर 1000 से 5000 रुपये तक लिए गए।
बड़ा सवाल….
आखिर चेतावनी बोर्ड और बार-बार की शिकायतों के बावजूद अवैध वसूली का यह सिलसिला कब रुकेगा? क्या निलंबन के बाद व्यवस्था में वास्तविक सुधार होगा या फिर कुछ दिन बाद सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा? फिलहाल वायरल वीडियो ने स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है, और प्रशासन पर पारदर्शिता व सख्त निगरानी की जिम्मेदारी और बढ़ा दी है।
