बिलासपुर-मुंगेली मार्ग का यह पुल बना मौत का रास्ता; मरम्मत के नाम पर मज़ाक! फिर जर्जर हुआ करोड़ों का पुल..हर रोज़ गुजरती है मौत…फिर भी चुप है प्रशासन..हाईकोर्ट की फटकार भी बेअसर, पुल बना हादसों का घर!

छत्तीसगढ़: (प्रांशु क्षत्रिय) बिलासपुर मुंगेली मार्ग का बरेला पुल: जहां हर सफर एक जोखिम है..बरेला पुल…नाम सुनते ही अब स्थानीय लोगों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच जाती हैं। मुंगेली और बिलासपुर को जोड़ने वाला यह पुल अब केवल एक रास्ता नहीं, बल्कि हर गुजरते वाहन के लिए मौत का न्यौता बन चुका है। कुछ महीने पहले जब इस पुल की जर्जर हालत को लेकर सवाल उठे थे, तब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई थी। अधिकारियों को जमकर फटकार लगी थी। कागजों पर लाखों रुपये मरम्मत में खर्च भी दिखाए गए। मगर हकीकत आज फिर वही है..उखड़ी हुई सड़क, गड्ढों में तब्दील सतह और हर वक्त हादसे का डर। पुल की हालत यह है कि हल्की बारिश में ही इसकी सतह जलमग्न हो जाती है। वाहन चालकों को समझ ही नहीं आता कि गड्ढा कहां है और सड़क कहां। कई बार स्कूल बसें और एंबुलेंसें भी पानी में फंस चुकी हैं। हालांकि पुल पर भारी वाहनों के गुजरने पर प्रतिबंध है, लेकिन हकीकत में हर दिन सैकड़ों ट्रक, लोडिंग वाहन और यहां तक कि स्कूल बसें इस पर से गुजरती हैं। यह नजारा किसी बड़े हादसे को न्यौता देने जैसा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुल की मरम्मत केवल कागजों पर हुई है। दो महीने में ही मरम्मत की परतें उखड़ गईं। सवाल ये उठ रहे हैं जब लाखों रुपये खर्च हुए थे तो फिर स्थिति इतनी बदतर क्यों है?
मंत्री-अफसर सब गुजरते हैं, फिर भी नहीं दिखती सुध..!
यह पुल स्थानीय नेताओं, मंत्रियों और आला अफसरों की भी नियमित आवाजाही का मार्ग है। फिर भी समस्या जस की तस है। न कोई स्थायी योजना बनी, न कोई प्रभावी कार्रवाई हुई। हर दिन यह पुल जानलेवा साबित हो रहा है। हर रोज़ जाम, हर रोज़ खतरा, हर रोज़ अव्यवस्था। लोगों का गुस्सा अब फूटने को तैयार है।


