सीपत; 15 साल से मुआवजे के लिए भटकते किसान, दी चक्का जाम की चेतावनी— अब सब्र का बांध टूटने को है!..सालों पहले हुआ था जमीन अधिग्रहण, आश्वासन बहुत मिला, अब आर-पार की लड़ाई..15 दिन का अल्टीमेटम, नहीं तो सीपत-बलौदा मार्ग में होगा चक्काजाम, पढ़िए पूरी खबर……..

सीपत: (प्रांशु क्षत्रिय) एक ओर सरकार किसानों की भलाई के दावे कर रही है, वहीं सीपत तहसील के नरगोड़ा पोड़ी गांव के करीब 40 आदिवासी किसान पिछले 15 सालों से अपने हक के मुआवजे के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। यह कहानी है उन किसानों की, जिन्होंने अपनी पुश्तैनी जमीन सिंचाई विभाग को दे दी, लेकिन बदले में आज तक एक रुपया भी नहीं मिला। करीब 14-15 साल पहले बांधा तालाब चौड़ीकरण परियोजना के तहत इन किसानों की जमीन अधिग्रहित कर ली गई थी। अधिकारियों ने तब मुआवजे का वादा किया, लेकिन आज तक सिर्फ फाइलें खिसकीं, पैसे नहीं। किसान रामकुमार कुंभकार बताते हैं कि यह सभी किसान आदिवासी समुदाय से हैं और जमीन जाने के बाद उनकी खेती भी छिन गई, रोज़ी भी गई और अब उम्मीद भी टूटने लगी है। किसानों का कहना है कि उन्होंने सिंचाई विभाग से लेकर कलेक्टर कार्यालय तक हर दरवाज़ा खटखटाया। हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, लेकिन मुआवजा नहीं। अब इन किसानों की आर्थिक स्थिति बद से बदतर हो गई है। किसानों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर 15 दिनों के भीतर मुआवजा नहीं दिया गया तो वे सीपत-बलौदा मुख्य मार्ग पर चक्का जाम करेंगे। अब उनके सब्र का बांध टूटने को है। अब तक इस गंभीर मसले पर प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। किसानों का साफ कहना है कि अब वे वादों पर नहीं, सिर्फ कार्रवाई पर भरोसा करेंगे। देखना होगा कि 15 वर्षों से दबे इस अन्याय की आवाज़ प्रशासन तक कब और कैसे पहुंचती है।
