17 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’..साइबर ठगी के पीड़ित ने सुनाई खौफनाक आपबीती; बिलासपुर पुलिस के ‘साइबर संवाद’ में खुले ठगी के राज..IG रामगोपाल गर्ग और DIG रजनेश सिंह ने समझाया साइबर ठगों का खेल!


बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) साइबर अपराधियों के बढ़ते जाल के बीच बिलासपुर पुलिस ने आमजन को जागरूक करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मंगलवार को ‘साइबर संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया। लाल बहादुर शास्त्री सभागार में आयोजित कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों के साथ मीडिया, बैंकिंग क्षेत्र, व्यापारी वर्ग, सामाजिक संगठनों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में साइबर ठगी के पीड़ितों ने मंच से अपनी आपबीती साझा कर लोगों को साइबर अपराधियों के तौर-तरीकों से रूबरू कराया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज रामगोपाल गर्ग एवं उप पुलिस महानिरीक्षक/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने की। ‘साइबर जागृति अभियान’ के तहत आयोजित इस संवाद का उद्देश्य लोगों को साइबर अपराध के नए तरीकों, ठगी से बचाव और घटना होने के बाद तत्काल उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी देना था।
भरोसा जीतते हैं, कमजोरी तलाशते हैं साइबर ठग……
कार्यक्रम में सवालों का जवाब देते हुए आईजी रामगोपाल गर्ग ने बताया कि साइबर अपराधी लोगों को पहले विश्वास में लेने की कोशिश करते हैं। बातचीत के दौरान उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियों और कमजोरियों को पहचानकर उसी आधार पर दबाव बनाया जाता है और फिर आर्थिक ठगी को अंजाम दिया जाता है। वहीं एसएसपी रजनेश सिंह ने साइबर ठगी के दौरान अपराधियों द्वारा अपनाए जाने वाले मनोवैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ठग किस तरह बातचीत के दौरान व्यक्ति को मानसिक दबाव में लेकर उससे स्वयं बैंक खाते से रकम ट्रांसफर करवा लेते हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि संदिग्ध कॉल, लिंक, ओटीपी या व्यक्तिगत बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें और किसी भी दबाव में आकर तत्काल निर्णय न लें।
‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 17 दिन तक बनाया दबाव…….
‘साइबर संवाद’ की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साइबर ठगी के उन पीड़ितों की आपबीती रही, जिनकी शिकायतों पर बिलासपुर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ठगी की रकम वापस कराने में मदद की। एक पीड़ित ने बताया कि साइबर अपराधियों ने उसे करीब 17 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर मानसिक दबाव में रखा। अपराधियों ने भय और दबाव का माहौल बनाकर उसे अपने प्रभाव में ले लिया था। पीड़ित ने कार्यक्रम में पूरी घटना साझा करते हुए बताया कि किस तरह साइबर ठगों ने उसे अपने जाल में फंसाया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सरकंडा थाना पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए पीड़ित की सहायता की और उसे साइबर अपराधियों के चंगुल से बाहर निकाला। अन्य पीड़ितों ने भी ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी कॉल और डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी घटनाएं साझा कीं।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर भी हुई चर्चा…….
कार्यक्रम में बिलासपुर व्यापारी संघ के सदस्य ने बच्चों और बच्चियों के साथ होने वाली साइबर बुलीइंग से जुड़ा सवाल पुलिस अधिकारियों के सामने रखा। इस पर अधिकारियों ने अभिभावकों को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों के प्रति सजग रहने और उन्हें साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की जरूरत बताई। मीडिया प्रतिनिधियों ने भी साइबर अपराध की मौजूदा परिस्थितियों और चुनौतियों से जुड़े सवाल रखे। पुलिस अधिकारियों ने सवालों का जवाब देते हुए साइबर अपराध से बचाव के उपाय साझा किए।
छात्रों से बोले IG; अनजान लिंक और ऑफर पर न करें भरोसा…..
कार्यक्रम के समापन अवसर पर आईजी रामगोपाल गर्ग ने स्कूली छात्र-छात्राओं से इंटरनेट और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी अनजान व्यक्ति, लिंक, मैसेज या ऑनलाइन ऑफर पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें। विद्यार्थियों से स्वयं जागरूक रहने के साथ परिवार और आसपास के लोगों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की अपील की गई।
ठगी होते ही 1930 पर करें शिकायत……
एसएसपी रजनेश सिंह ने नागरिकों से अपील की कि साइबर ठगी होने पर घबराने के बजाय तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें। उन्होंने कहा कि समय पर शिकायत मिलने से ठगी गई रकम को होल्ड या रिकवर कराने की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने नागरिकों से साइबर अपराध के प्रति सतर्क रहने की अपील की। कार्यक्रम को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए बिलासपुर पुलिस के आधिकारिक इंस्टाग्राम पेज से इसकी ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग भी की गई। इससे सभागार के बाहर मौजूद लोग भी कार्यक्रम से जुड़ सके।

