VIDEO! सीपत; बहू भागी, ससुर हो गए समाज से बहिष्कृत!..धीवर समाज बना जज-ज्यूरी, दिया तानाशाही फरमान…पीड़ित ने प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार, खबर पढ़कर समझिए पूरा मामला……

सीपत: (प्रांशु क्षत्रिय) छत्तीसगढ़ सरकार ने भले ही सामाजिक बहिष्कार को रोकने के लिए कड़ा कानून बना दिया हो, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी चौंकाने वाली है। बिलासपुर जिले के ग्राम टेकर में देवी प्रसाद धीवर का परिवार पिछले एक साल से सामाजिक बहिष्कार की पीड़ा झेल रहा है, वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि उनके बेटे की नई नवेली दुल्हन शादी के महज आठ दिन बाद किसी और के साथ फरार हो गई। मामला सीपत थाना क्षेत्र का है। देवी प्रसाद ने 2024 में अपने बेटे की शादी सीपत के ग्राम पोड़ी की युवती से की थी। लेकिन शादी के कुछ ही दिन बाद बहू अपने मायके के एक युवक संग फरार हो गई। देवी प्रसाद ने दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से मामला सुलझा लिया, लेकिन यही बात उनके लिए मुसीबत बन गई। समाज के अध्यक्ष राजेंद्र धीवर, सचिव पवन धीवर और कोषाध्यक्ष सतीश धीवर ने आरोप लगाया कि देवी प्रसाद ने बिना समाज को बताए समझौता कर लिया। इसी आधार पर उन्होंने देवी प्रसाद पर 50 हजार रुपए का अर्थदंड लगा दिया। जब वह यह जुर्माना नहीं दे सका तो उसे समाज से बहिष्कृत कर दिया गया। हद तो तब हो गई जब 19 जुलाई 2024 को देवी प्रसाद के भाई की मृत्यु हो गई। समाज के पदाधिकारियों ने रिश्तेदारों को अंतिम संस्कार में शामिल होने तक से मना कर दिया। चेतावनी दी गई कि जो भी शामिल होगा, उसे एक लाख रुपये का जुर्माना भरना होगा। परिणामस्वरूप देवी प्रसाद के अपने तक उसके भाई के क्रियाकर्म में शामिल नहीं हो सके। देवी प्रसाद का कहना है कि उनका परिवार एक साल से सामाजिक तिरस्कार झेल रहा है। अब रिश्तेदार भी घर आना-जाना छोड़ चुके हैं। आखिरकार न्याय की उम्मीद में उन्होंने पूरे मामले की शिकायत कलेक्टर से की है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब सवाल ये उठता है कि जब सामाजिक बहिष्कार कानूनन अपराध है, तो फिर गांवों में ऐसे ‘तानाशाह’ समाज प्रमुखों पर कार्रवाई कब होगी?


















