मुक्तिधाम का रास्ता बंद तो थम गया अंतिम सफर; ग्रामीण और जमीन मालिक आमने-सामने..प्रशासन ने खुलवाया रास्ता!


बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) तखतपुर क्षेत्र के ग्राम पंचायत डोमनपुर में मुक्तिधाम जाने वाले रास्ते को लेकर विवाद खड़ा हो गया। निजी जमीन पर बाउंड्रीवाल किए जाने से वर्षों पुराने रास्ते के बंद होने का दावा किया गया, जिसके कारण गांव में एक व्यक्ति की मौत के बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए मुक्तिधाम ले जाने में परिजनों और ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलने पर प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों से चर्चा के बाद तत्काल रास्ता खुलवाया गया।
शव लेकर पहुंचे ग्रामीण, रास्ता बंद देख बढ़ी परेशानी……
बताया गया कि डोमनपुर में एक व्यक्ति की मौत के बाद परिजन और ग्रामीण शव को मुक्तिधाम ले जाने के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान रास्ते पर बाउंड्रीवाल होने के कारण आगे जाने में दिक्कत हुई। ग्रामीणों की शिकायत के बाद तहसीलदार शशांक शेखर शुक्ला, नायब तहसीलदार और थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे। दोनों पक्षों से बातचीत के बाद तत्काल रास्ता खुलवाया गया, जिसके बाद शव को मुक्तिधाम ले जाकर अंतिम संस्कार कराया गया।
ग्रामीण बोले- करीब 100 साल से हो रहा इस्तेमाल…….
ग्रामीणों का कहना है कि मुक्तिधाम तक पहुंचने वाला यह रास्ता करीब सौ वर्षों से निस्तारी और अंतिम संस्कार के लिए इस्तेमाल होता आ रहा है। सरपंच प्रतिनिधि विजय जायसवाल ने आरोप लगाया कि रास्ते पर बार-बार कब्जे की स्थिति बनाकर बाउंड्रीवाल कर दी जाती है, जिससे ग्रामीणों को विशेषकर अंतिम संस्कार के समय परेशानी का सामना करना पड़ता है।
जमीन मालिक ने कहा- निजी संपत्ति, बिना सूचना तोड़ी बाउंड्रीवाल……
दूसरी ओर जमीन मालिक हितेश चंद्राकर का कहना है कि जिस जमीन पर बाउंड्रीवाल बनाई गई है, वह उनकी निजी संपत्ति है। उनका आरोप है कि उन्हें बिना सूचना दिए बाउंड्रीवाल तोड़कर रास्ता बनाया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि पूर्व में बेजा कब्जे से संबंधित मामला न्यायालय में चल चुका है, जिसमें उनके पक्ष में फैसला आया था।
तत्काल रास्ता खुला, स्थायी समाधान अभी बाकी……
प्रशासन के हस्तक्षेप से तत्काल रास्ता खुलवाकर अंतिम संस्कार तो करा दिया गया, लेकिन निजी जमीन से होकर जाने वाले रास्ते के स्थायी अधिकार को लेकर विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ है। ग्रामीण अब प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि मुक्तिधाम तक आने-जाने के रास्ते का स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि भविष्य में किसी की मौत के बाद अंतिम यात्रा के दौरान ऐसी स्थिति दोबारा निर्मित न हो।

